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फिल्म समीक्षा: सिकंदर – सलमान खान का सिर्फ नाम काफी नहीं!

निर्देशक: ए. आर. मुरुगादॉस
निर्माता: साजिद नाडियाडवाला
कलाकार: सलमान खान, रश्मिका मंदाना, सत्यराज, जतिन सरना, काजल अग्रवाल, अंजिनी धवन, शरमन जोशी, प्रतीक बब्बर, संजय कपूर, नवाब शाह
रेटिंग: ⭐⭐ (2/5)


कहानी का हाल: कहीं की ईंट, कहीं का रोड़ा

फिल्म सिकंदर में सलमान खान ‘राजासाब’ के किरदार में नजर आते हैं, जो राजकोट के एक रियासतदार हैं और देश के कुल सोने का 25% हिस्सा उनके पास है। राजा साब को एक युवती (रश्मिका मंदाना) से प्यार हो जाता है और वह उससे शादी कर लेते हैं। लेकिन, रानी साहिबा का एक हादसे में निधन हो जाता है। मरने से पहले वह अपने अंगदान कर देती है – दिल, फेफड़े और आंखें तीन अलग-अलग लोगों को मिलती हैं।

फिल्म की कहानी यहीं से ‘जय हो’ जैसी सामाजिक सेवा वाले ट्रैक पर चल पड़ती है। लेकिन, मुरुगादॉस का निर्देशन और लेखकों की बिखरी पटकथा इसे बेदम बना देती है। प्रतीक बब्बर और सत्यराज विलेन के रूप में मौजूद हैं, लेकिन न उनमें दम दिखता है और न ही उनके किरदार में कोई धार है।


एक्टिंग: सलमान खान या डुप्लीकेट?

फिल्म देखते हुए कई बार ऐसा लगता है कि सलमान खान खुद फिल्म में हैं ही नहीं। तमाम लॉन्ग शॉट्स और एक्शन सीक्वेंस में ऐसा महसूस होता है कि कोई डुप्लीकेट शूटिंग कर रहा है। सलमान के चेहरे पर भी अब पहले वाला जोश नजर नहीं आता। उनके एक्सप्रेशन्स सपाट हैं और अभिनय में वो पुरानी ऊर्जा गायब है। रश्मिका मंदाना भी सिर्फ स्क्रीन पर दिखने के लिए हैं, उनकी और सलमान की केमिस्ट्री में न के बराबर ट्यूनिंग नजर आती है।


निर्देशन और पटकथा: कमजोर पकड़

ए. आर. मुरुगादॉस, जिन्होंने कभी गजनी और हॉलीडे जैसी जबरदस्त फिल्में दी थीं, इस बार कमजोर साबित हुए हैं। पटकथा बिखरी हुई है, कहानी में कोई कसाव नहीं है। फिल्म कई बार लॉजिक को भी तोड़ देती है, जैसे एक गुजराती राजा दिल्ली में लोगों से गुजराती में बात करके काम निकलवा लेता है!


संगीत: एक भी यादगार गाना नहीं

फिल्म का म्यूजिक प्रीतम ने दिया है और गाने समीर अनजान ने लिखे हैं, लेकिन एक भी गाना ऐसा नहीं है जो ईद के बाद याद रहे। ‘कल आपके नसीब में ये रात हो न हो…’ गाना एक इमोशनल ट्रैक जरूर है, लेकिन वह भी कोई खास असर नहीं छोड़ता।


तकनीकी पक्ष: वीएफएक्स और सिनेमैटोग्राफी का हाल

फिल्म के वीएफएक्स भी औसत हैं। एक्शन सीक्वेंस में भी कोई नयापन नहीं है। कैमरा वर्क और सिनेमैटोग्राफी साधारण है, जो फिल्म की भव्यता को भी फीका कर देती है।


क्या देखें, क्या छोड़ें?

सिकंदर सिर्फ सलमान खान के नाम पर बनाई गई फिल्म है, जिसमें न कहानी है, न दमदार अभिनय, और न ही यादगार संगीत। फिल्म को देखने का एकमात्र कारण सलमान खान के फैंस हो सकते हैं, लेकिन उनके लिए भी यह फिल्म निराशाजनक साबित होगी।


अंतिम फैसला:

अगर आप सलमान खान के जबरदस्त फैन हैं, तो ही सिनेमाहॉल का रुख करें, वरना यह फिल्म ओटीटी पर आने का इंतजार करना बेहतर रहेगा।
👉 रेटिंग: ⭐⭐ (2/5)

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