प्रयागराज, 26 फरवरी 2026
ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी की अग्रिम जमानत याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में 27 फरवरी को सुनवाई होगी। यह सुनवाई न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की अदालत में प्रस्तावित है। दोनों पर एक तथाकथित धर्मगुरु की शिकायत के आधार पर नाबालिगों के कथित यौन शोषण का मामला दर्ज किया गया है।
यह मामला स्पेशल कोर्ट के आदेश पर पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज किया गया है, जिसके बाद शंकराचार्य और उनके शिष्य ने गिरफ्तारी से राहत पाने के लिए अग्रिम जमानत याचिका दायर की है।
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, एक स्वयंभू धर्मगुरु ने आरोप लगाया है कि कुछ नाबालिग बालकों के साथ कथित रूप से यौन शोषण किया गया। शिकायत के आधार पर स्पेशल कोर्ट (पॉक्सो एक्ट) ने एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया। इसके बाद संबंधित धाराओं में मामला पंजीकृत किया गया।
एफआईआर दर्ज होने के बाद से ही यह मामला धार्मिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। आरोप गंभीर प्रकृति के हैं, इसलिए कानून के तहत जांच प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
अग्रिम जमानत की मांग
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी की ओर से दाखिल याचिका में कहा गया है कि उन पर लगाए गए आरोप निराधार और दुर्भावनापूर्ण हैं। याचिका में गिरफ्तारी पर रोक लगाने और जांच में सहयोग करने की बात कही गई है।
अदालत में सुनवाई के दौरान यह तय होगा कि आरोपों की प्रकृति और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर उन्हें अग्रिम जमानत दी जाए या नहीं।
जांच और मेडिकल परीक्षण
सूत्रों के अनुसार, मामले में एक नाबालिग का मेडिकल परीक्षण कराया जा चुका है, जबकि दूसरे का परीक्षण दो दिन बाद प्रस्तावित है। पुलिस और संबंधित जांच एजेंसियां साक्ष्य जुटाने में लगी हुई हैं। मेडिकल रिपोर्ट और अन्य सबूत अदालत में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया
मामले को लेकर विभिन्न जिलों में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ संगठनों और राजनीतिक दलों ने निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं, कुछ स्थानों पर शंकराचार्य के समर्थन में प्रदर्शन भी किए गए हैं।
समर्थकों का कहना है कि यह मामला उनकी छवि धूमिल करने के उद्देश्य से दर्ज कराया गया है, जबकि शिकायतकर्ता पक्ष का दावा है कि न्यायिक प्रक्रिया के तहत निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों को सजा मिलनी चाहिए।
आगे क्या?
अब सभी की नजरें 27 फरवरी को होने वाली हाईकोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं। अदालत का फैसला यह तय करेगा कि शंकराचार्य और उनके शिष्य को अंतरिम राहत मिलती है या नहीं।
मामला संवेदनशील होने के कारण प्रशासन भी सतर्क है। अदालत के निर्देशों और जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी।
(नोट: यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है। आरोप सिद्ध होने तक किसी को दोषी नहीं माना जा सकता।)

