मथुरा | संवाददाता
वक्फ संशोधन विधेयक 2024 के लोकसभा में पेश होने के बाद मथुरा में एक नई बहस छिड़ गई है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष और हिंदू धर्मगुरु दिनेश फलाहारी ने इस मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने खून से पत्र लिखा है। उन्होंने मांग की है कि वक्फ बोर्ड की जमीन पर कॉलेज, अस्पताल और पुलिस क्वार्टर बनाए जाएं, जिससे आम जनता को इसका लाभ मिल सके।
धर्मगुरु का दावा – हिंदुओं के साथ हुआ अन्याय
अपने पत्र में दिनेश फलाहारी ने लिखा कि 1947 में देश का विभाजन हुआ था, जिसमें पाकिस्तान मुसलमानों के लिए बना था और हिंदुस्तान हिंदुओं के लिए। लेकिन, कांग्रेस सरकार ने वक्फ बोर्ड का गठन करके देश की बहुमूल्य भूमि मुसलमानों को सौंप दी, जिससे हिंदुओं को लगातार नुकसान उठाना पड़ा। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि इस भूमि का उपयोग जनता के हित में किया जाए।
देशद्रोह का आरोप और कड़ी कार्रवाई की मांग
पत्र में उन्होंने यह भी लिखा कि जो भी व्यक्ति वक्फ बोर्ड का समर्थन करता है, वह देश विरोधी है। ऐसे लोगों पर देशद्रोह का मुकदमा चलाकर उन्हें पाकिस्तान भेज देना चाहिए, ताकि वे वहां मस्जिद और मजार बना सकें। उन्होंने पीएम मोदी से अपील की कि वक्फ बोर्ड की संपत्तियों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और इन्हें सार्वजनिक उपयोग में लाया जाए।
तीन वर्षों से बिना भोजन और नंगे पैर जीवन यापन
धर्मगुरु दिनेश फलाहारी वही व्यक्ति हैं, जिन्होंने तीन वर्ष पहले यह प्रण लिया था कि जब तक श्रीकृष्ण जन्मभूमि से मथुरा की मस्जिद नहीं हटाई जाती, तब तक वे भोजन ग्रहण नहीं करेंगे। तब से लेकर अब तक वे बिना भोजन और नंगे पैर जीवन व्यतीत कर रहे हैं।
सोशल मीडिया पर पत्र वायरल
इस मुद्दे को लेकर सोशल मीडिया पर भी बहस छिड़ गई है। दिनेश फलाहारी ने यह पत्र ट्वीट कर पीएम मोदी को भेजा है, जिसके बाद यह वायरल हो गया। कई लोग उनके समर्थन में आ रहे हैं, जबकि कुछ इसे कट्टरपंथी विचारधारा करार दे रहे हैं।
सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार
अब देखना होगा कि केंद्र सरकार इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है और वक्फ संशोधन विधेयक 2024 को लेकर क्या निर्णय लेती है। फिलहाल, इस विषय पर राजनीतिक और धार्मिक क्षेत्रों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।

