गाजीपुर न्यूज़ | The KN News के लिए विशेष रिपोर्ट
गाजीपुर (नंदगंज):
थाना नंदगंज क्षेत्र के बड़हरा गांव स्थित एक निजी स्कूल में चौंकाने वाला घोटाला सामने आया है। स्कूल प्रशासन ने अपनी ही महिला क्लर्क पर धोखाधड़ी, जालसाजी और लाखों रुपये के गबन का गंभीर आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया है। आरोपी महिला क्लर्क का नाम अदिति सिंह है, जो तुरना गांव की निवासी है।
📌 क्या है पूरा मामला?
बड़हरा निवासी और स्कूल के प्रबंधक फौजदार चौहान ने पुलिस को दी गई तहरीर में बताया कि उनका स्कूल महमूदपुर पाली में स्थित है, जहाँ नर्सरी से कक्षा 10 तक की शिक्षा दी जाती है। अदिति सिंह इस स्कूल में 3 सितंबर 2021 से कैश काउंटर क्लर्क के पद पर कार्यरत थी और फीस संग्रहण की जिम्मेदारी उसी के पास थी।
प्रबंधक का आरोप है कि अदिति सिंह छात्रों से पूरी फीस वसूलती थी, लेकिन स्कूल के खाते में कम राशि जमा करती थी। वह फीस नकद और PhonePe जैसे ऑनलाइन माध्यम से भी वसूलती थी। लेकिन हैरान करने वाली बात यह रही कि वह छात्रों की फीस का पैसा अपने भाई के बैंक खाते में UPI के जरिए ट्रांसफर करवाती थी।
📊 कैसे हुआ घोटाले का खुलासा?
साल 2024 में स्कूल की लेखा-परीक्षा (Audit) के दौरान फीस रसीदों की जाँच की गई, जिसमें कई अनियमितताएं पाई गईं।
जब छात्रों को दी गई मूल रसीदों और उनकी कार्बन कॉपी का मिलान किया गया, तब यह सामने आया कि दोनों में दर्ज रकमों में भारी अंतर है।
📌 उदाहरण:
- एक छात्र को दी गई मूल रसीद में ₹11,000 की फीस दिखाई गई,
- जबकि उसी की कार्बन कॉपी में ₹8,000 ही दर्ज था।
इस तरह करीब 50 से अधिक रसीदों की जांच में खुलासा हुआ कि सत्र 2024-2025 में अदिति सिंह ने ₹70,150 की हेराफेरी की।
लेकिन यह यहीं नहीं रुका। पिछले तीन वर्षों की लेखा-परीक्षा के अनुसार, कुल मिलाकर अदिति सिंह द्वारा ₹5 से ₹6 लाख रुपये का गबन किया गया है।
📜 स्कूल प्रबंधन की प्रतिक्रिया
प्रबंधक फौजदार चौहान ने बताया:
“हमें यकीन नहीं हो रहा कि जिस पर हम तीन सालों से विश्वास करते आ रहे थे, उसने हमें इस तरह धोखा दिया। हम बच्चों की शिक्षा के लिए ईमानदारी से काम करते हैं और ऐसे कृत्य पूरे संस्थान की छवि को खराब करते हैं। हमने पुलिस को सभी दस्तावेज सौंप दिए हैं और कानूनी कार्रवाई शुरू हो चुकी है।”
👮♀️ पुलिस की कार्रवाई
नंदगंज थाना प्रभारी ने पुष्टि की है कि महिला क्लर्क अदिति सिंह के खिलाफ IPC की धाराओं 420 (धोखाधड़ी), 467/468 (जालसाजी) और 409 (आमीन द्वारा आपराधिक विश्वासघात) के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
फिलहाल पूरे मामले की गहन जांच की जा रही है और अदिति सिंह से जल्द पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया जा सकता है।
📣 अभिभावकों में नाराजगी
जैसे ही यह मामला सामने आया, स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों में गहरी नाराजगी फैल गई। कुछ अभिभावकों का कहना है कि
“हम बच्चों की फीस समय से जमा करते हैं, फिर भी स्कूल बार-बार डिफॉल्टर बता देता था। अब समझ में आया कि मामला अंदर से ही गड़बड़ था। ऐसे कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।”
📌 अब आगे क्या?
- पुलिस ने कहा है कि आरोपों की पुष्टि के लिए डिजिटल ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड, UPI स्टेटमेंट, फीस रजिस्टर और रसीद बुक्स की फॉरेंसिक जांच की जा रही है।
- यदि आरोप सही पाए गए, तो अदिति सिंह की गिरफ्तारी तय मानी जा रही है।
🧾 यह मामला क्यों है महत्वपूर्ण?
यह घटना शिक्षा जगत में काम कर रहे संस्थानों को यह सोचने पर मजबूर करती है कि किस हद तक आंतरिक वित्तीय पारदर्शिता जरूरी है। यदि स्कूल प्रशासन समय रहते लेखा-परीक्षा न करता, तो यह गबन लंबे समय तक चलता रहता।

