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आगरा में बीजेपी विधायक के चाचा की बीच सड़क पिटाई, नगर निगम कर्मियों पर गुंडागर्दी का आरोप; CCTV में कैद हुई पूरी घटना

उत्तर प्रदेश के आगरा में नगर निगम की कार्रवाई के दौरान बड़ा बवाल खड़ा हो गया है। खेरिया मोड़ (जगनेर रोड) स्थित एक मिठाई की दुकान पर प्लास्टिक के गिलास मिलने के बाद चालान की कार्रवाई को लेकर विवाद इतना बढ़ गया कि नगर निगम कर्मियों ने दुकान मालिक की सड़क पर डंडों से पिटाई कर दी। पीड़ित दुकानदार स्थानीय बीजेपी विधायक भगवान सिंह कुशवाहा के रिश्ते में चाचा हैं। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है और राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखी जा रही है।

क्या है पूरा मामला?

घटना बुधवार दोपहर करीब 1 बजे की है। खेरागढ़ विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी विधायक भगवान सिंह कुशवाहा के रिश्तेदार जगदीश कुशवाहा की मिठाई की दुकान “नत्थी मिष्ठान भंडार” पर नगर निगम की टीम निरीक्षण के लिए पहुंची।

टीम का नेतृत्व कर रहे सेनेटरी फूड इंस्पेक्टर (SFI) प्रदीप गौतम ने दुकान में रखे चार प्लास्टिक के गिलास और पॉलीथीन के आधार पर जुर्माने की कार्रवाई शुरू की। दुकानदार के अनुसार, उन्हें ₹5000 का चालान थमाने की बात कही गई, लेकिन बातचीत के बाद ₹3000 नकद लिए गए और रसीद ₹1000 की दी गई।

विरोध करने पर पहुंचा बुलडोजर, की गई पिटाई

दुकानदार का आरोप है कि जब उन्होंने इस अव्यवस्था पर आपत्ति जताई तो नगर निगम टीम ने धमकाया और कुछ ही देर बाद 15-20 कर्मचारियों और बुलडोजर के साथ दुकान पर दोबारा धावा बोल दिया।

कर्मचारियों ने दुकानदार को जमीन पर गिराकर डंडों से पीटा, जबकि बचाने आए उनके भाई नीरज कुशवाहा और पत्नी मंजू कुशवाहा के साथ भी मारपीट की गई। डर से पास के दुकानदार तमाशबीन बने रहे, किसी ने हस्तक्षेप नहीं किया।

घटना का वीडियो CCTV और मोबाइल कैमरों में कैद हो गया, जिसमें एक कर्मचारी को दुकानदार की छाती पर पैर रखकर पीटते हुए साफ देखा जा सकता है।

पुलिस में शिकायत, मेडिकल परीक्षण, हंगामा

मारपीट के बाद दोनों पक्ष सराय ख्वाजा पुलिस चौकी पहुंचे जहां एक घंटे तक हंगामा चलता रहा। बाद में दोनों पक्षों के तीन-तीन लोगों का मेडिकल परीक्षण कराया गया:

दुकानदार पक्ष से: जगदीश, नीरज और मंजू कुशवाहा
निगम पक्ष से: प्रदीप गौतम (SFI), सफाईकर्मी भोला और मधुसूदन

एसीपी लोहामंडी मयंक तिवारी ने बताया कि तहरीर मिलने के बाद जांच कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

निगम का पक्ष: दुकानदार ने पहले हमला किया

सेनेटरी फूड इंस्पेक्टर प्रदीप गौतम ने दावा किया कि कार्रवाई के दौरान दुकानदार ने लोहे की सरिया से हमला किया और सफाईकर्मियों पर पथराव भी किया, जिससे भोला और मधुसूदन को चोट आई।

उन्होंने कहा कि इसी कारण बाद में अतिक्रमण के तहत कार्रवाई की गई।

विधायक की नाराज़गी, सीएम तक पहुंचेगा मामला

बीजेपी विधायक भगवान सिंह कुशवाहा ने इस घटना पर नाराजगी जताते हुए कहा कि:

“नगर निगम के कर्मचारियों ने बिना मजिस्ट्रेट की उपस्थिति के कार्रवाई की, मारपीट और अभद्रता की गई। मैं इस मामले को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष उठाऊंगा। साथ ही आगरा आकर नगरायुक्त और जिलाधिकारी से भी बात करूंगा।”

नगर निगम ने दिए जांच के आदेश

नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल ने मामले की जांच के लिए अपर नगर आयुक्त शिशिर कुमार को जांच अधिकारी नियुक्त किया है। बताया गया कि यह विवाद अतिक्रमण और प्लास्टिक प्रतिबंध को लेकर था।

बाजार समिति की मध्यस्थता की कोशिश

अजीत नगर बाजार कमेटी के अध्यक्ष राजेश यादव ने बताया कि मामले को शांत कराने के लिए दोनों पक्षों के बीच समझौते की कोशिशें चल रही हैं। उन्होंने कहा कि विवाद की जड़ शराब के ठेके के पास गिलास की बिक्री को लेकर हुई नगर निगम की सख्ती है।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं: बसपा ने की निंदा

बसपा पार्षद सुनील शर्मा ने इस घटना को “अधिकारियों की तानाशाही” बताते हुए कहा कि:

“नगर निगम को नियमों के तहत काम करना चाहिए, न कि जनता को पीट-पीटकर डराना। बसपा व्यापारियों के साथ खड़ी है और हम इस तानाशाही का विरोध करेंगे।”

सबसे बड़ा सवाल: क्या कार्रवाई के नाम पर गुंडागर्दी?

इस घटना ने नगर निगम की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

क्या चालान की कार्रवाई में मारपीट और बुलडोजर चलाना ज़रूरी था?
क्या प्रशासन अब बिना मजिस्ट्रेट के आदेश के दुकानों को तोड़ेगा?

आगरा की यह घटना न केवल कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है बल्कि निगम कर्मचारियों की जवाबदेही और अधिकारों की सीमाओं को भी उजागर करती है।

भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए जवाबदेही तय करना और निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

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