लखनऊ।
उत्तर प्रदेश भारतीय जनता पार्टी को जल्द ही नया प्रदेश अध्यक्ष मिलने वाला है। शनिवार को केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री और सात बार के सांसद पंकज चौधरी ने भाजपा प्रदेश कार्यालय, लखनऊ में औपचारिक रूप से अध्यक्ष पद के लिए अपना नामांकन दाखिल कर दिया। उनके नामांकन के प्रस्तावक स्वयं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बने, जिससे यह साफ संकेत मिल गया कि शीर्ष नेतृत्व का भरोसा पूरी तरह पंकज चौधरी पर है।
नामांकन के दौरान प्रदेश की सत्ता और संगठन का मजबूत संगम देखने को मिला। इस मौके पर डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, ब्रजेश पाठक, मंत्री सूर्य प्रताप शाही, स्वतंत्रदेव सिंह, दारा सिंह चौहान, ए.के. शर्मा, कमलेश पासवान, राज्यमंत्री असीम अरुण समेत कुल दस वरिष्ठ नेताओं ने पंकज चौधरी के नाम का प्रस्ताव रखा।
संगठन और सरकार की साझा पसंद
पंकज चौधरी का नामांकन सिर्फ एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि भाजपा की आगामी रणनीति का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी का प्रस्तावक बनना यह दर्शाता है कि पार्टी नेतृत्व संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय के लिए एक अनुभवी और भरोसेमंद चेहरे को आगे लाना चाहता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2027 विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा संगठन को नए सिरे से धार देने की तैयारी में है और पंकज चौधरी इस भूमिका के लिए उपयुक्त माने जा रहे हैं।
रविवार को होगा औपचारिक ऐलान
भाजपा सूत्रों के अनुसार, रविवार को लोहिया नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, लखनऊ में प्रदेश अध्यक्ष के नाम का औपचारिक ऐलान किया जाएगा। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े भी मौजूद रहेंगे।
लखनऊ एयरपोर्ट पर ANI से बातचीत में पंकज चौधरी ने कहा था,
“आज भाजपा के सभी सांसदों को बुलाया गया है। प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव है, अब आगे पार्टी तय करेगी।”
उनके इस बयान से स्पष्ट है कि पार्टी नेतृत्व पहले ही व्यापक सहमति बना चुका है।
कौन हैं पंकज चौधरी?
पंकज चौधरी कुर्मी (ओबीसी) समुदाय से आते हैं, जो उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा और प्रभावशाली वोट बैंक माना जाता है। उनका जन्म 15 नवंबर 1964 को गोरखपुर में हुआ। वे स्वर्गीय उद्योगपति भगवती चौधरी के पुत्र और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष उज्ज्वला चौधरी के छोटे बेटे हैं।
राजनीति में उनका सफर बेहद लंबा और अनुभवपूर्ण रहा है—
- 1989: गोरखपुर नगर निगम से पार्षद
- 1990: भाजपा जिला कार्य समिति के सदस्य
- 1991: 10वीं लोकसभा में महराजगंज से सांसद
- 1996 और 1998: 11वीं और 12वीं लोकसभा में पुनः निर्वाचित
- 1999: सपा से हार
- 2004: लोकसभा में वापसी
- 2009: कांग्रेस से हार
- 2014 से अब तक: लगातार लोकसभा सांसद
वर्तमान में वे केंद्र सरकार में वित्त राज्य मंत्री के रूप में कार्यरत हैं।
कुर्मी समाज में मजबूत पकड़, सोशल इंजीनियरिंग के माहिर
पंकज चौधरी की सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत उनकी कुर्मी बिरादरी में गहरी पकड़ मानी जाती है। साथ ही, अन्य पिछड़ी और गैर-यादव ओबीसी जातियों में भी उनका प्रभाव है। विरोधी दल भी उनकी सोशल इंजीनियरिंग की क्षमता के कायल माने जाते हैं।
गोरखपुर से अलग होकर बने महराजगंज जिले में जिला पंचायत पर लंबे समय से भाजपा का वर्चस्व रहा है। इस वर्चस्व के पीछे पंकज चौधरी की रणनीतिक भूमिका मानी जाती है। उनके भाई प्रदीप चौधरी और उनकी मां उज्ज्वला चौधरी जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुकी हैं।
यह भी उल्लेखनीय है कि आरक्षण व्यवस्था में बदलाव के बावजूद उनके करीबी और विश्वसनीय सहयोगी ही लगातार इस पद पर चुने जाते रहे, जो उनकी संगठनात्मक पकड़ और जमीनी नेटवर्क को दर्शाता है।
2027 की तैयारी में अहम कड़ी
भाजपा के भीतर यह माना जा रहा है कि पंकज चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर पार्टी ओबीसी समीकरण को और मजबूत करना चाहती है। साथ ही, लंबे संसदीय अनुभव और केंद्र व राज्य दोनों स्तरों पर स्वीकार्यता उन्हें संगठन को एकजुट रखने में मदद कर सकती है।
प्रदेश अध्यक्ष के रूप में यदि उनकी ताजपोशी होती है, तो वे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ मिलकर चुनावी रणनीति, संगठन विस्तार और बूथ स्तर तक पार्टी को मजबूत करने की बड़ी जिम्मेदारी निभाएंगे।

