लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार की गलत नीतियों ने देश की अर्थव्यवस्था को बर्बादी के कगार पर ला दिया है। महंगाई और बेरोजगारी चरम पर हैं, जबकि शेयर बाजार में लगातार गिरावट देखी जा रही है।
शेयर बाजार में गिरावट से युवा निवेशकों को झटका
अखिलेश यादव ने कहा कि शेयर बाजार की मौजूदा गिरावट से सबसे अधिक प्रभावित युवा निवेशक हुए हैं। उन्होंने अपनी मेहनत की गाढ़ी कमाई शेयर बाजार में निवेश की थी, लेकिन उन्हें भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। सेंसेक्स और निफ्टी में लगातार गिरावट से आम जनता की संपत्ति घट रही है।
भाजपा की आर्थिक नीतियों पर सवाल
अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा सरकार की नीतियों ने भारतीय अर्थव्यवस्था को कमजोर कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियां केवल बड़े उद्योगपतियों के पक्ष में काम कर रही हैं, जबकि आम जनता महंगाई और बेरोजगारी की मार झेल रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को युवा निवेशकों और मध्यम वर्ग के लिए ठोस आर्थिक नीतियां बनानी चाहिए।
रुपये की गिरावट और महंगाई का असर
सपा प्रमुख ने रुपये की लगातार गिरावट को भी चिंता का विषय बताया। डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत कमजोर हो रही है, जिससे आयात महंगा हो रहा है और महंगाई बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को चाहिए कि वह घरेलू निवेशकों को सुरक्षित माहौल दे और आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए ठोस कदम उठाए।
शेयर बाजार में ‘स्टॉक माफिया’ का खेल
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में ‘स्टॉक माफिया’ सक्रिय हो गए हैं। उन्होंने कहा कि बाजार में जब आम लोग खरीदते हैं, तब कीमतें गिरा दी जाती हैं, और जब बेचते हैं, तब उन्हें नुकसान होता है। यह पूरा खेल कुछ बड़े संस्थागत निवेशकों और ब्रोकरों के हाथ में है, जिससे आम निवेशकों को लगातार नुकसान हो रहा है।
युवाओं के लिए ठोस नीति बनाने की मांग
अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार से मांग की कि वह युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाए और शेयर बाजार में छोटे निवेशकों को सुरक्षा देने के लिए उचित कदम उठाए। उन्होंने कहा कि यदि सरकार समय रहते सही निर्णय नहीं लेती है, तो इसका खामियाजा देश की अर्थव्यवस्था को भुगतना पड़ेगा।
अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं और देश की गिरती अर्थव्यवस्था को लेकर चिंता व्यक्त की है। उनका मानना है कि यदि सरकार समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाती, तो देश के करोड़ों मध्यम वर्गीय और युवा निवेशकों को और अधिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

