गाजीपुर।
जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव 2027 नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे गाजीपुर की सियासत में हलचल तेज़ होती जा रही है। समाजवादी पार्टी (सपा) के भीतर टिकट की दौड़ ने अब ऐसा रूप ले लिया है कि कुछ धुरंधर नेता कथित तौर पर गोदी मीडिया और माउथ मीडिया के सहारे अपने ही दल के निर्वाचित विधायकों के खिलाफ मोर्चा खोलते नज़र आ रहे हैं। नतीजा यह है कि पार्टी की अंदरूनी कलह सार्वजनिक मंचों तक पहुंच गई है और इसका सीधा नुकसान सपा की साख को हो रहा है, जबकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) इस हालात का राजनीतिक लाभ उठाने में जुटी है।
2022 की एकजुटता, 2027 की खींचतान
गौरतलब है कि वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) ने गठबंधन के तहत गाजीपुर जनपद की सभी सात विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ा था।
इनमें सदर से जैकिशन साहू, जमानियां से ओमप्रकाश सिंह, मुहम्मदाबाद से मन्नू अंसारी, सैदपुर से अंकित भारती और जंगीपुर से डॉ. वीरेंद्र यादव समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी थे, जबकि जहुराबाद से ओमप्रकाश राजभर और जखनियां से बेदी राम सुभासपा के प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरे थे।
इन सातों सीटों पर भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा और सपा-सुभासपा गठबंधन ने भारी बहुमत से जीत दर्ज की। उस समय पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) की एकजुटता सपा की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी थी।
टिकट की लालसा में सार्वजनिक टकराव
अब 2027 की तैयारी के साथ ही वही एकजुटता दरकती दिख रही है। जंगीपुर, सदर और सैदपुर विधानसभा क्षेत्रों में सपा के कुछ प्रभावशाली नेता कथित तौर पर टिकट पाने की होड़ में अपने ही विधायकों के खिलाफ सार्वजनिक रूप से बयानबाज़ी कर रहे हैं।
आरोप है कि गोदी मीडिया और माउथ मीडिया के ज़रिए विधायकों की ‘पोल खोलने’ का अभियान चलाया जा रहा है, जिससे न सिर्फ विधायकों की छवि को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि पार्टी की भी किरकिरी हो रही है। इस पूरे घटनाक्रम में जिले के कुछ माननीयों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं, जिन पर आग में घी डालने का आरोप लगाया जा रहा है।
BJP को मिल रहा सीधा राजनीतिक लाभ
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सपा की यह अंदरूनी खींचतान भाजपा के लिए संजीवनी साबित हो रही है।
जहां एक ओर भाजपा सड़क, बिजली, रोजगार जैसे बुनियादी मुद्दों पर सवालों से घिरी रहती है, वहीं दूसरी ओर सपा के भीतर चल रही इस आपसी लड़ाई से उसका ध्यान भटक रहा है। भाजपा इन विवादों को हवा देकर पीडीए के नारे को कमजोर करने की रणनीति पर काम कर रही है।
नतीजतन, सपा कार्यकर्ता और नेता आपस में ही उलझते जा रहे हैं, जिससे संगठनात्मक मजबूती प्रभावित हो रही है।
जंगीपुर, सदर और सैदपुर में सबसे ज्यादा हलचल
सूत्रों के मुताबिक, जंगीपुर विधानसभा में सपा सुप्रीमो के करीबी बताए जाने वाले एक युवा नेता ने सीटिंग विधायक के खिलाफ खुले तौर पर मोर्चा खोल रखा है। बताया जा रहा है कि टिकट की उम्मीद में गोदी मीडिया का सहारा लेकर माहौल बनाया जा रहा है।
इसी तरह सदर और सैदपुर विधानसभा में भी कुछ धुरंधर नेता अपने-अपने विधायकों के खिलाफ लामबंद हैं और सियासी साजिशों के जरिए पार्टी के भीतर ही तनाव पैदा कर रहे हैं।
जमानियां और मुहम्मदाबाद में शांति
इसके उलट जमानियां और मुहम्मदाबाद विधानसभा क्षेत्रों में फिलहाल सियासी माहौल अपेक्षाकृत शांत बताया जा रहा है। यहां के विधायकों के सामने ऐसे नेताओं की रणनीति सफल नहीं हो पा रही है, जिसके चलते अंदरूनी विवाद खुलकर सामने नहीं आ रहा है।
बड़ा सवाल: किसे होगा फायदा, किसे नुकसान?
अब बड़ा सवाल यह है कि टिकट की इस जंग में शामिल ये धुरंधर नेता अपने मिशन में कितने सफल हो पाते हैं और इसका समाजवादी पार्टी को कितना राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ेगा।
अगर समय रहते पार्टी नेतृत्व ने इस अंदरूनी कलह पर लगाम नहीं लगाई, तो 2022 में जिस एकजुटता के दम पर भाजपा को करारी शिकस्त मिली थी, वही एकजुटता 2027 में कमजोर पड़ सकती है।
फिलहाल गाजीपुर की राजनीति में यह साफ़ दिखाई दे रहा है कि मुकाबला सिर्फ विपक्ष से नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर भी चल रहा है—और इस ‘अपने ही गोल’ की राजनीति का सबसे ज़्यादा फायदा विरोधी दल उठाने को तैयार बैठा है।
— The KN News


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