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ब्रेकिंग न्यूज़: पप्पू यादव ने धीरेंद्र शास्त्री को धोखेबाज़ बताया, BJP पर धार्मिक नेताओं का इस्तेमाल करने का आरोप

पटना: बागेश्वर धाम के प्रमुख, धीरेंद्र शास्त्री, जो वर्तमान में बिहार में हनुमान कथा का आयोजन कर रहे हैं, को लेकर बिहार के सांसद पप्पू यादव ने तीखा बयान दिया है। यादव ने शास्त्री को “धोखेबाज़” और “नटबर लाल बाबा” करार देते हुए भाजपा पर आरोप लगाया कि वह धार्मिक नेताओं का उपयोग चुनावी लाभ के लिए कर रही है।

पप्पू यादव, जो बिहार के पूर्णिया से सांसद हैं, ने शास्त्री के गोपालगंज में आगमन से पहले मीडिया से बातचीत में कहा, “धीरेंद्र शास्त्री एक धोखेबाज़ व्यक्ति हैं, जो धर्म के नाम पर लोगों को ठग रहे हैं। इन्हें ‘नटबर लाल बाबा’ के रूप में जाना जाता है। अगर मेरी पार्टी सत्ता में आती है, तो शास्त्री को जेल भेजा जाएगा।” यादव ने यह भी कहा कि भाजपा चुनाव जीतने के लिए धार्मिक नेताओं का सहारा ले रही है, जो पूरी तरह से धोखाधड़ी पर आधारित है।

पप्पू यादव के इन बयानों के बाद, भाजपा नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। भाजपा प्रवक्ता और सांसद रोहिणी आचार्य ने पप्पू यादव के आरोपों की निंदा करते हुए कहा, “बिहार में धार्मिक सौहार्द को लेकर इस प्रकार के राजनीतिक हमलों से कोई फर्क नहीं पड़ेगा। बिहार का लोकतांत्रिक समाज इस तरह की विभाजनकारी राजनीति को स्वीकार नहीं करेगा। यहां के लोग ऐसे सस्ते राजनीतिक हथकंडों से प्रभावित नहीं होंगे, चाहे भाजपा अपने चुनाव प्रचार में खुद को बाबाओं के साथ खड़ा कर ले।”

रोहिणी आचार्य ने आगे कहा, “धर्म का सम्मान करना हमारी पार्टी की परंपरा है, और हम कभी भी धार्मिक नेताओं का अपमान नहीं करेंगे। बिहार, जो अपनी लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष संस्कृति के लिए प्रसिद्ध है, इस प्रकार के आरोपों से प्रभावित नहीं होगा।”

धीरेंद्र शास्त्री, जो मध्य प्रदेश के बागेश्वर धाम के प्रमुख हैं, बिहार में अपनी हनुमान कथा के कार्यक्रमों के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहे हैं। उनका बिहार में आना भाजपा के लिए एक अहम अवसर के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि पार्टी धार्मिक नेताओं के साथ अपने संबंधों को मजबूत करना चाहती है।

पप्पू यादव के बयान से राजनीतिक माहौल गरमा गया है, और यह साफ है कि इस मुद्दे पर बिहार में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। भाजपा और पप्पू यादव दोनों के बयानों ने बिहार की राजनीति को एक नई दिशा दी है, जहां धर्म और राजनीति के रिश्ते पर फिर से सवाल उठ रहे हैं। इस विवाद का असर आगामी चुनावों में भी देखने को मिल सकता है।

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