सुल्तानपुर: उत्तर प्रदेश के मंत्री और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद ने एक बयान देकर प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी है। दरअसल, उन्होंने अपनी एक सभा में यह दावा किया कि वह अपनी स्थिति तक पहुँचने के लिए सात दरोगाओं के हाथ-पैर तुड़वाकर, उन्हें गड्ढे में फेंकवा कर यहां पहुंचे हैं। उनका यह बयान राजनीति के गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है, और विपक्षी दलों ने इसे लेकर प्रदेश सरकार पर हमला बोल दिया है।
चांदा के मदारडीह में हुआ विवादास्पद बयान
डॉ. संजय निषाद अपने “संवैधानिक अधिकार यात्रा” के दौरान चांदा के मदारडीह में एक सभा को संबोधित कर रहे थे। इसी सभा में उन्होंने अपने बयान में कहा, “हम यहां ऐसे नहीं पहुंचे हैं। सात दरोगाओं के हाथ-पैर तुड़वाकर, उन्हें गड्ढे में फेंकवा कर तब मैं यहां पहुंचा हूं।” इस बयान के बाद सभा में उपस्थित समर्थकों ने जोरदार तालियां बजाईं, जो इस बात को और भी विवादित बना गया।
उनका यह बयान सीधे तौर पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ हिंसा की ओर इशारा करता हुआ प्रतीत हुआ, जिससे यह बयान राज्य की राजनीति में एक नई बहस का कारण बन गया है।
विपक्ष ने किया तीखा हमला
संजय निषाद के बयान के बाद विपक्षी दलों ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी। समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता ने इसे लोकतांत्रिक मर्यादाओं का उल्लंघन और सरकारी अधिकारियों के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा देने वाला बयान बताया। उनके अनुसार, “इस बयान से न केवल प्रशासनिक व्यवस्था को चोट पहुँचती है, बल्कि यह सरकारी अधिकारियों के खिलाफ हिंसा की संस्कृति को बढ़ावा देने वाला भी है।”
कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने भी इसे लोकतांत्रिक और संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ एक गंभीर आरोप करार दिया। उनका कहना था कि एक मंत्री का इस तरह का बयान राज्य की राजनीति में एक खतरनाक दिशा की ओर इशारा करता है।
सरकार का बचाव: भाजपा ने किया समर्थन
भा.ज.पा. के प्रवक्ता ने इस बयान को केवल एक शाब्दिक और प्रतीकात्मक वक्तव्य करार दिया। उन्होंने कहा, “संजय निषाद के शब्दों का गलत अर्थ निकाला गया है। उनका उद्देश्य किसी प्रकार की हिंसा को प्रोत्साहित करना नहीं था।” भाजपा नेताओं का कहना था कि यह बयान एक राजनीतिक संदर्भ में था और इसे गंभीर रूप से नहीं लिया जाना चाहिए।
भा.ज.पा. के नेताओं ने यह भी कहा कि इस प्रकार के बयान राजनीतिक संघर्ष का हिस्सा होते हैं, जिन्हें सांकेतिक रूप से समझा जाना चाहिए। उनका यह तर्क था कि संजय निषाद ने किसी भी अधिकारी के खिलाफ व्यक्तिगत रूप से हिंसा का आह्वान नहीं किया, बल्कि यह केवल राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता को लेकर व्यक्त किया गया एक बयान था।
मंत्री की सफाई
इस बयान के बाद संजय निषाद ने सफाई दी कि उनके शब्दों का गलत अर्थ निकाला गया है। उन्होंने कहा, “मैंने किसी भी पुलिसकर्मी या प्रशासनिक अधिकारी को हिंसा करने के लिए नहीं कहा था। यह सिर्फ एक शाब्दिक बयान था, जो राजनीतिक संघर्ष को दर्शाता है।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि उनका उद्देश्य किसी को भी अपमानित करना या हिंसा को बढ़ावा देना नहीं था।
राजनीतिक माहौल में गर्मी
इस बयान के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नई गर्मी आ गई है। जहां एक ओर विपक्षी दलों ने इसे सरकार और मंत्री के खिलाफ गंभीर आरोप माना है, वहीं सत्ताधारी भाजपा इसे एक सामान्य वक्तव्य करार दे रही है।
राज्य में पुलिस बल और प्रशासन की विश्वसनीयता को लेकर उठे इस विवाद के बाद, यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या सरकार इस मामले में कोई कार्रवाई करती है, और विपक्षी दल क्या कदम उठाते हैं। साथ ही, मंत्री संजय निषाद का यह बयान भविष्य में राजनीतिक वाद-विवाद को और भी बढ़ावा दे सकता है।
इस विवादित बयान ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया मोड़ लिया है। संजय निषाद के बयान को लेकर अब राज्य की राजनीति में अलग-अलग राय बन गई हैं। जहां एक ओर भाजपा इसे एक सामान्य बयान मान रही है, वहीं विपक्ष इसे संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ एक गंभीर हमला मान रहा है। अब यह देखने वाली बात होगी कि इस पर आगे कौन से कदम उठाए जाते हैं और यह राजनीतिक विवाद कहां तक बढ़ता है।

