लखनऊ:
समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव ने मंगलवार को पार्टी विधायक इंद्रजीत सरोज द्वारा भारतीय मंदिरों और देवताओं को लेकर दिए गए विवादित बयान से खुद को अलग कर लिया है।
अखिलेश यादव ने कहा कि उन्होंने इंद्रजीत सरोज या रामजी लाल सुमन के बयान को नहीं सुना है, लेकिन उन्होंने स्पष्ट रूप से यह कहा कि पार्टी में किसी को इतिहास से जुड़े सवाल नहीं उठाने चाहिए।
उन्होंने कहा, “अगर इतिहास हमें अच्छा रास्ता नहीं दिखा सकता, सकारात्मक दिशा नहीं दे सकता, तो उसे इतिहास ही रहने देना चाहिए। समाजवादियों ने हमेशा प्रगतिशील बातें की हैं और आगे भी वही करना चाहिए।”
इंद्रजीत सरोज ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि “अगर मंदिरों में शक्ति होती, तो मोहम्मद बिन कासिम, महमूद गजनवी और मोहम्मद गोरी जैसे आक्रमणकारी भारत में प्रवेश नहीं कर पाते।”
उन्होंने आगे कहा, “जब मुस्लिम आक्रमणकारी लूटपाट कर रहे थे, तब हमारे देवी-देवता क्या कर रहे थे? अगर उनमें शक्ति होती तो वो श्राप दे सकते थे। इसका मतलब यह है कि उनमें कोई कमी है।”
यह बयान रामजी लाल सुमन के एक अन्य विवादित बयान के बाद आया, जिसमें उन्होंने राणा सांगा को ‘गद्दार’ कहा था और आरोप लगाया था कि उन्होंने बाबर को भारत बुलाया था।
इन बयानों को लेकर राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है और विपक्षी दलों द्वारा समाजवादी पार्टी पर हमला तेज कर दिया गया है।

