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छत्तीसगढ़ के नारायणपुर में सुरक्षाबलों की बड़ी कार्रवाई: मुठभेड़ में 26 माओवादी ढेर, टॉप कमांडर केशव राव भी मारा गया

नारायणपुर/बिजापुर, 21 मई 2025 – छत्तीसगढ़ में माओवादी आतंक के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। नारायणपुर और बीजापुर जिले की सीमा से लगे अबूझमाड़ इलाके में सुरक्षाबलों और माओवादियों के बीच पिछले 50 घंटे से जारी मुठभेड़ में अब तक 26 माओवादी मारे जा चुके हैं। मारे गए नक्सलियों में टॉप माओवादी नेता नंबाला केशव राव उर्फ बसवराज भी शामिल है, जो माओवादी संगठन का केंद्रीय सैन्य आयोग प्रमुख था।

कैसे हुई यह कार्रवाई?

यह ऑपरेशन जिला रिजर्व गार्ड (DRG) की चार जिलों — नारायणपुर, दंतेवाड़ा, बीजापुर और कोंडागांव — की संयुक्त टीम द्वारा किया गया। खुफिया इनपुट्स के आधार पर सुरक्षाबलों ने अबूझमाड़ के घने जंगलों में माओवादियों के गढ़ को निशाना बनाकर अभियान चलाया। यह क्षेत्र माओवादी माड़ डिवीजन के वरिष्ठ कैडरों की गतिविधियों का केंद्र माना जाता है।

बरामदगी और नुकसान

अभी तक की जानकारी के अनुसार:

  • 26 माओवादी ढेर
  • भारी मात्रा में हथियार, गोला-बारूद और संचार उपकरण बरामद
  • कई आईईडी, डेटोनेटर, बीजीएल शेल्स और अन्य विस्फोटक सामग्री जब्त
  • जंगल में बने 200 से अधिक माओवादी ठिकाने और बंकर नष्ट
  • करीब 12,000 किलोग्राम खाद्य सामग्री भी जब्त की गई

ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट की अगली कड़ी

यह मुठभेड़ एक महीने पहले हुए ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट की सफलता के बाद हुई है, जिसमें छत्तीसगढ़-तेलंगाना बॉर्डर के पास 31 माओवादी मारे गए थे। उस ऑपरेशन में भी सुरक्षाबलों ने भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद जब्त किए थे।

नक्सली नेटवर्क को बड़ा झटका

विशेषज्ञों के अनुसार, इस ऑपरेशन में केशव राव जैसे बड़े नेता की मौत माओवादी संगठन के लिए बहुत बड़ा झटका है। केशव राव को विचारधारा, रणनीति और संचालन तीनों मोर्चों पर माहिर माना जाता था। यह माओवादी संगठन की सैन्य ताकत पर सीधा प्रहार है।

सरकार और सुरक्षा एजेंसियों की प्रतिक्रिया

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने इस ऑपरेशन को “ऐतिहासिक सफलता” करार देते हुए सुरक्षाबलों की प्रशंसा की है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने भी ट्वीट कर सुरक्षाबलों को बधाई दी और कहा कि “माओवादी हिंसा का अंत अब निकट है।”

आगे क्या?

अबूझमाड़ क्षेत्र में तलाशी अभियान अभी भी जारी है क्योंकि आशंका है कि कुछ माओवादी घायल अवस्था में जंगलों में छिपे हो सकते हैं। ड्रोन और थर्मल इमेजिंग उपकरणों की मदद से पूरे क्षेत्र की निगरानी की जा रही है।


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