लखनऊ, 20 मई: उत्तर प्रदेश की राजनीति में डीएनए विवाद को लेकर छिड़ा जुबानी जंग अब और तेज होती जा रही है। इस विवाद में अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी हस्तक्षेप किया है। उन्होंने समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव को संयम बरतने की सलाह दी है और उनकी पार्टी की भाषा को “अशोभनीय” करार दिया है।
योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को एक बयान में कहा, “हालांकि समाजवादी पार्टी से किसी आदर्श व्यवहार की अपेक्षा करना व्यर्थ है, लेकिन एक सभ्य समाज इस तरह की अभद्र भाषा को सहन नहीं कर सकता। सपा के शीर्ष नेतृत्व को चाहिए कि वे अपने सोशल मीडिया हैंडल पर नियंत्रण रखें और सुनिश्चित करें कि वहाँ की भाषा मर्यादित और शालीन हो।”
यह विवाद 16 मई को उस समय शुरू हुआ जब समाजवादी पार्टी के मीडिया सेल ने एक पोस्ट में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के डीएनए पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। पोस्ट में दावा किया गया था कि ब्रजेश पाठक का डीएनए “सोना गाछी और जीबी रोड” से जुड़ा हुआ है।
इसके बाद ब्रजेश पाठक ने 17 मई को सोशल मीडिया पर सीधे अखिलेश यादव और उनकी पत्नी डिंपल यादव से सवाल पूछते हुए कहा, “क्या यही आपकी पार्टी की भाषा है? क्या यह किसी के दिवंगत माता-पिता के लिए चयनित शब्द हैं? क्या डिंपल जी इस अपमानजनक मानसिकता को स्वीकार करेंगी?”
पाठक ने आगे कहा, “अखिलेश जी, यदि आप बदल सकते हैं तो स्वयं को और अपनी पार्टी के डीएनए को बदलिए, नहीं तो 2027 तक और उसके बाद भी यही डीएनए आपको परेशान करता रहेगा। अब हर गली, हर मोहल्ले, हर गाँव-शहर से यही डीएनए गूंजेगा।”
इस बयानबाजी के बीच, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने भी ब्रजेश पाठक का समर्थन करते हुए सपा पर निशाना साधा और कहा, “परिवारवाद अब पूरी तरह से गुंडागर्दी में बदल चुका है।”
विवाद के बढ़ते स्वरूप के बीच अखिलेश यादव ने 19 मई को एक पोस्ट में सफाई देते हुए कहा, “हम अपने लोगों को समझा देंगे, लेकिन आप भी अपनी भाषा पर संयम रखें।”
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह पूरा विवाद आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए जातीय और भावनात्मक मुद्दों को उभारने की कोशिश है। सोशल मीडिया के इस दौर में राजनीतिक दलों के आधिकारिक हैंडल से की गई टिप्पणियाँ सीधा जनमानस को प्रभावित करती हैं, और ऐसे में संयम व मर्यादा की अपेक्षा और भी जरूरी हो जाती है।

