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लखनऊ में लगे “अखिलेश यादव माफी मांगो” पोस्टर, डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक पर टिप्पणी को लेकर सियासी बवाल

लखनऊ | 20 मई 2025

उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर उबाल आ गया है। समाजवादी पार्टी (सपा) और उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के बीच चल रही जुबानी जंग अब पोस्टर वार तक पहुंच चुकी है। राजधानी लखनऊ के 1090 चौराहे पर “अखिलेश यादव माफी मांगो” के पोस्टर लगाए गए हैं, जिसने प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी है।

बताया जा रहा है कि ये पोस्टर ब्रजेश पाठक के समर्थकों द्वारा लगाए गए हैं। इन पोस्टरों में सपा प्रमुख अखिलेश यादव से माफी की मांग की गई है, जो कथित रूप से पाठक के खिलाफ पार्टी के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी के विरोध में हैं।

ब्रजेश पाठक का तीखा हमला

डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने X पर एक पोस्ट में अखिलेश यादव पर तीखा तंज कसा। उन्होंने लिखा, “@yadavakhilesh जी, आपने मेरे सवाल का जवाब देने के लिए एक लंबा लेख सोशल मीडिया पर पोस्ट करवाया, जिसे पढ़ने से पहले एक बार बच्चों की थ्योरी भी देख लेते। आपने राजनीतिक विज्ञान की जगह होम साइंस की चाबी से जवाब टाइप कर दिया। मैं आपसे आपकी पार्टी के DNA के बारे में पूछ रहा हूं।”

पाठक ने सपा के इतिहास पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर समाजवादी पार्टी के DNA की परतें खोली जाएं, तो उसमें माफिया अतीक अहमद, मुख्तार अंसारी, मुजफ्फरनगर दंगे, राम मंदिर आंदोलन में कारसेवकों पर गोलीबारी, गोमती रिवर फ्रंट और खनन घोटाले जैसे काले अध्याय सामने आ जाएंगे।

उन्होंने कहा, “जैसे ही DNA की बात होगी, समाजवादी पार्टी की सच्चाई एक-एक करके सामने आ जाएगी। अतीक और मुख्तार जैसे चेहरे, दंगों की तस्वीरें, कारसेवकों पर गोली की यादें और भ्रष्टाचार की बदबू पूरे प्रदेश को फिर से झकझोर देगी।”

जनता दर्शन और एम्बुलेंस योजना का जिक्र

ब्रजेश पाठक ने अखिलेश यादव को अपने “जनता दर्शन” कार्यक्रम में आने का निमंत्रण भी दिया और उन्हें सपा सरकार के विवादित एम्बुलेंस योजना का दौरा कराने की पेशकश की, जिसे उन्होंने खुद अखिलेश के मंत्रीमंडल द्वारा आलोचना के घेरे में बताया।

FIR और राजनीतिक माहौल

इस पूरे विवाद के बीच भाजपा ने समाजवादी पार्टी के मीडिया सेल पर डिप्टी सीएम के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप में FIR दर्ज करवाई है। भाजपा नेताओं का कहना है कि यह केवल व्यक्तिगत हमला नहीं, बल्कि संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति का अपमान है।

उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव से पहले सियासी बयानबाज़ी और आरोप-प्रत्यारोप के दौर ने एक बार फिर तेज़ी पकड़ ली है। ‘DNA’ शब्द अब केवल वैज्ञानिक संदर्भ तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सियासी दलों के इतिहास, विचारधारा और नीयत की कसौटी बन गया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि अखिलेश यादव इस हमले का क्या जवाब देते हैं, और क्या पोस्टर वार की यह सियासत किसी बड़े टकराव का संकेत है।

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