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बिहार न्यूज़: राजद विधायक पर केस करने वाले पंचायत सचिव पर महिला ने लगाया रिश्वत का आरोप, मामला गरमाया

रिपोर्ट: KN न्यूज़ डेस्क | स्थान: पटना, बिहार | तारीख: 30 जुलाई 2025

बिहार की राजनीति और प्रशासन एक बार फिर से चर्चा में है। पटना जिले के मनेर प्रखंड में तैनात पंचायत सचिव संदीप कुमार पर एक महिला ने गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला का दावा है कि वह अपने पति के मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए पंचायत सचिव से मिली थीं लेकिन सचिव ने न केवल उससे रिश्वत मांगी बल्कि दुर्व्यवहार भी किया।

इस पूरे मामले में नया मोड़ तब आया जब यह पता चला कि उक्त पंचायत सचिव ने कुछ दिन पहले ही राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के विधायक भाई वीरेंद्र के खिलाफ SC-ST एक्ट के तहत केस दर्ज कराया था। अब पंचायत सचिव का कहना है कि महिला को उनके खिलाफ खड़ा करने के पीछे विधायक का ही हाथ है और उन्हें दबाव में लाने की कोशिश की जा रही है।

📌 महिला ने क्या आरोप लगाए?

पीड़िता पिंकी देवी का आरोप है कि वह अपने पति अविनाश कुमार के मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए 13 जुलाई 2025 को अपने पिता के साथ पंचायत सचिव संदीप कुमार के पास गई थीं। उन्होंने सचिव को प्रमाण पत्र के लिए जरूरी आवेदन दिया। आवेदन देने के बाद सचिव ने कहा कि अब इसमें देरी हो चुकी है और प्रमाण पत्र बनाने के लिए कुछ “खर्चा” लगेगा।

पिंकी देवी के अनुसार, पंचायत सचिव ने ₹1500 की मांग की। महिला ने गरीबी का हवाला देते हुए कहा कि फिलहाल वह ₹500 ही दे सकती हैं। उन्होंने ₹500 दे दिए और बाकी पैसा बाद में देने की बात कही।

कुछ दिनों बाद जब वह दोबारा पंचायत सचिव से मिलने गईं तो सचिव ने न केवल अपशब्द कहे, बल्कि उनका हाथ पकड़कर धक्का भी दे दिया। इस घटना से डर और गुस्से में आकर महिला ने अपने परिजनों के साथ मनेर के विधायक भाई वीरेंद्र से संपर्क किया और उनसे मदद मांगी।

इसके बाद महिला ने मनेर थाने में पंचायत सचिव के खिलाफ लिखित शिकायत दी। पुलिस ने शिकायत दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

🎙️ महिला का बयान:

“मैं अपने पति के मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए गई थी। सचिव ने मुझसे पैसे मांगे। मैंने ₹500 दिए। बाद में जब दुबारा गई तो उन्होंने बदतमीजी की और मुझे धक्का दिया। मैं बहुत डर गई थी। अब मुझे इंसाफ चाहिए।”

🧾 सचिव का पलटवार: “यह सब विधायक के इशारे पर हो रहा है”

पंचायत सचिव संदीप कुमार ने महिला के आरोपों को झूठा, निराधार और एक साजिश बताया है। उन्होंने खुलकर कहा कि यह सब कुछ मनेर के राजद विधायक भाई वीरेंद्र के इशारे पर हो रहा है।

उनका कहना है कि चूंकि उन्होंने विधायक के खिलाफ SC-ST एक्ट में पटना एससी-एसटी थाना में केस दर्ज कराया है, इसलिए विधायक उन पर दबाव बनाने के लिए इस महिला को आगे कर रहे हैं।

🔍 सचिव का बयान:

“मैंने विधायक के खिलाफ जातिसूचक शब्दों और धमकी देने का केस दर्ज कराया था। अब वो मुझे फंसाने की कोशिश कर रहे हैं ताकि मैं डर जाऊं और केस वापस ले लूं। महिला को मोहरा बनाया गया है। मैं डरने वाला नहीं हूं।”

🎧 ऑडियो वायरल हुआ था

इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई थी जब कुछ दिन पहले पंचायत सचिव और विधायक के बीच फोन पर हुई बातचीत का ऑडियो वायरल हो गया था। ऑडियो में कथित रूप से विधायक द्वारा जातिसूचक शब्दों का प्रयोग और धमकी दिए जाने की बात कही गई थी।

इस ऑडियो के वायरल होते ही पंचायत सचिव ने कार्रवाई करते हुए विधायक भाई वीरेंद्र के खिलाफ अनुसूचित जाति-जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत केस दर्ज कराया था। इस घटना ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी थी।

अब उसी सचिव के खिलाफ एक महिला द्वारा रिश्वत और दुर्व्यवहार का आरोप लगना, पूरे मामले को नया मोड़ दे रहा है।

👮‍♂️ पुलिस की प्रतिक्रिया

मनेर थाने के थानाध्यक्ष प्रदीप कुमार ने कहा है कि शिकायत प्राप्त हो चुकी है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि सभी पक्षों की बातों को सुना जा रहा है और तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

“हम मामले की निष्पक्ष जांच कर रहे हैं। किसी के साथ अन्याय नहीं होगा। महिला की शिकायत दर्ज की गई है और पंचायत सचिव से भी पूछताछ की जाएगी।”

🏛️ राजद विधायक की ओर से कोई बयान नहीं

अब तक विधायक भाई वीरेंद्र की ओर से इस ताजा आरोपों पर कोई औपचारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि सचिव की ओर से यह स्पष्ट आरोप लगाया गया है कि विधायक उन्हें फंसाने की कोशिश कर रहे हैं।

⚖️ क्या कहता है कानून?

मृत्यु प्रमाण पत्र एक नागरिक अधिकार है जिसे आवेदन देने के बाद तय समय सीमा में जारी किया जाना चाहिए। इसके लिए किसी भी प्रकार की “घूस” मांगना गैरकानूनी और दंडनीय अपराध है।
अगर सचिव ने रिश्वत ली है तो भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के तहत कार्रवाई हो सकती है।
वहीं, अगर महिला झूठे आरोप लगाकर किसी को फंसाने की कोशिश कर रही है, तो भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत उस पर कार्रवाई हो सकती है।

🔥 राजनीतिक माहौल गर्म

इस पूरे घटनाक्रम ने स्थानीय राजनीति में गर्मी बढ़ा दी है। जहां पंचायत सचिव खुद को एक ईमानदार अधिकारी बता रहे हैं, वहीं महिला न्याय की गुहार लगा रही है। दूसरी ओर, विधायक पर सीधा आरोप लगना भी राजद पार्टी की छवि को प्रभावित कर सकता है।

इस मामले ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या यह सच में एक महिला की न्याय की लड़ाई है या फिर यह पूरा मामला राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित है?

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