The KN News, लखनऊ | 27 अगस्त 2025
लखनऊ। राजधानी लखनऊ के जानकीपुरम इलाके में मंगलवार शाम उस समय हड़कंप मच गया जब एक भाजपा का झंडा और विधायक का स्टीकर लगी बिना नंबर प्लेट की एसयूवी से स्कूल की छात्राओं से छेड़छाड़ करने वाले आरोपी ने पुलिस दरोगा को कुचलने का प्रयास किया। गनीमत रही कि दरोगा बाल-बाल बच गए और पीछा कर आरोपी को पकड़ लिया गया। लेकिन पुलिस की कार्रवाई सवालों के घेरे में है, क्योंकि आरोपी को थाने से छोड़ दिया गया जबकि केवल एसयूवी को सीज किया गया।
घटना कैसे हुई
जानकारी के अनुसार, मंगलवार शाम टेढ़ी पुलिया चौराहे पर गुडंबा थाने के दरोगा राम गोपाल यादव गश्त पर थे। इसी दौरान उन्होंने एक संदिग्ध एसयूवी को रोकने का प्रयास किया। गाड़ी रोकने की बजाय चालक ने तेज रफ्तार से दरोगा पर गाड़ी चढ़ाने की कोशिश की। हालांकि, दरोगा ने फुर्ती दिखाते हुए खुद को बचा लिया और करीब एक किलोमीटर पीछा कर गाड़ी को शनि मंदिर के पास पकड़ लिया।
आरोपी पर गंभीर आरोप
स्थानीय स्कूल की प्रधानाचार्या ने आरोप लगाया है कि कुछ दिनों से यह बिना नंबर की एसयूवी रोजाना स्कूल की छुट्टी के समय आती थी और उसमें सवार युवक छात्राओं से छेड़छाड़ करता था।
- 23 अगस्त को आरोपी स्कूल गेट तक पहुंचा और स्टाफ के विरोध करने पर उनकी गाड़ी में टक्कर मारी।
- यही नहीं, प्रधानाचार्या का आरोप है कि उसने उन पर भी गाड़ी चढ़ाने का प्रयास किया।
- शिकायत के बावजूद गुडंबा पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।
राजनीतिक रसूख का दावा
दरोगा द्वारा पकड़े जाने पर आरोपी ने खुद को पूर्व सांसद का रिश्तेदार बताया। यही नहीं, एसयूवी पर भाजपा का झंडा, विधायक का स्टीकर और बीकन लाइट लगी हुई थी। इस वजह से मामले ने राजनीतिक रंग भी पकड़ लिया है।
पुलिस की कार्रवाई पर सवाल
गुडंबा थाने के इंस्पेक्टर प्रभातेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि आरोपी गाड़ी के कागजात पेश नहीं कर सका, इसलिए वाहन को सीज कर दिया गया। लेकिन आश्चर्यजनक रूप से आरोपी को छोड़ दिया गया।
स्थानीय लोगों और स्कूल प्रशासन ने पुलिस पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि रसूखदार का रिश्तेदार बताकर आरोपी को बचाने की कोशिश की जा रही है।
बढ़ सकता है विवाद
यह घटना राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े करती है। एक ओर छात्राओं से छेड़छाड़ और पुलिस पर हमले जैसे गंभीर आरोप हैं, दूसरी ओर आरोपी को छोड़े जाने से लोगों में आक्रोश है।
सोशल मीडिया पर भी यह मामला तेजी से वायरल हो रहा है और विपक्षी दल इसे भाजपा की “गुंडागर्दी और पुलिस की ढिलाई” करार दे रहे हैं।

