जखनियां | The KN News
जखनियां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पर विधायक बेदी राम और तत्कालीन अधीक्षक डॉ. योगेंद्र यादव के बीच हुए विवाद का असर लगातार बढ़ता जा रहा है। विवाद के बाद अधीक्षक को हटाए जाने से नाराज़ स्वास्थ्यकर्मियों ने सोमवार को बांह पर काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराया और दोपहर 1 बजे से 2 बजे तक ओपीडी सेवाओं को पूरी तरह ठप कर दिया।
स्वास्थ्यकर्मियों की चेतावनी
सीएचसी के स्वास्थ्यकर्मियों ने साफ कहा है कि जब तक विधायक के साथ मौजूद उन दो लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, जिन्होंने अधीक्षक डॉ. यादव के साथ कथित धक्का-मुक्की की थी, तब तक विरोध जारी रहेगा। संगठन ने यह भी ऐलान किया है कि जरूरत पड़ी तो आंदोलन को प्रदेश स्तर तक ले जाया जाएगा।
हेल्थ वर्कर एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष मानवेंद्र उर्फ रानू पांडेय ने कहा –
“अधिकारियों ने बिना जांच किए अधीक्षक पर कार्रवाई कर दी, जबकि विधायक समर्थकों ने राजपत्रित अधिकारी के साथ धक्का-मुक्की की। लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। यह दोहरा मापदंड अस्वीकार्य है।”
घटना की पृष्ठभूमि
22 अगस्त को सुभासपा विधायक बेदी राम औचक निरीक्षण के लिए जखनियां सीएचसी पहुंचे थे। अस्पताल की व्यवस्था को लेकर उनकी अधीक्षक डॉ. योगेंद्र यादव से कहासुनी हो गई थी।
विधायक ने डीएम और सीएमओ से अस्पताल की शिकायत की थी, वहीं अधीक्षक ने भी सीएमओ को पत्र भेजकर आरोप लगाया था कि विधायक ने उनके कक्ष में रखी बीपी मशीन और शीशा तोड़ा तथा दुर्व्यवहार किया।
तीन दिन बाद सीएमओ ने अधीक्षक डॉ. योगेंद्र यादव को हटाकर कार्यालय से संबद्ध कर दिया। इसी निर्णय से नाराज़ स्वास्थ्यकर्मियों ने सोमवार को विरोध का रास्ता चुना।
सुबह से चला विरोध, दोपहर में ठप हुई ओपीडी
सुबह 8 बजे से स्वास्थ्यकर्मी काली पट्टी बांधकर ड्यूटी पर पहुंचे और मरीजों का इलाज किया। लेकिन दोपहर 1 बजे के बाद सभी कर्मचारी अपने कक्ष से बाहर निकल आए और नारेबाजी करते हुए विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस दौरान ओपीडी सेवाएं बंद कर दी गईं।
मरीजों को हुई दिक्कत
ओपीडी बंद होने से मरीजों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ा।
- रिंकी गोड़, हुरमुजपुर – “गिल्टी की शिकायत लेकर दोपहर 1 बजे अस्पताल पहुंची तो पर्ची नहीं मिली। मजबूरी में इमरजेंसी से दवा लेकर वापस जाना पड़ा।”
- अंश, हुरमुजपुर – “खांसी की शिकायत थी। अस्पताल पहुंचते-पहुंचते 1 बज गया। यहां बताया गया कि ओपीडी बंद है। बिना इलाज घर लौटना पड़ा।”
विधायक का पलटवार
वहीं, विधायक बेदी राम ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा –
“निरीक्षण के दौरान अधीक्षक मुझे विधायक नहीं बल्कि दलित समझकर दुर्व्यवहार कर रहे थे। अस्पताल में शासन की मंशा के विपरीत कार्य हो रहा है। मैं खुद मुख्यमंत्री से मिलकर पूरे मामले की जानकारी दूंगा।”
आगे की स्थिति
अब यह विवाद और पेचीदा होता जा रहा है। एक ओर स्वास्थ्यकर्मी अधीक्षक के पक्ष में लामबंद हैं, तो दूसरी ओर विधायक खुद को पीड़ित बता रहे हैं। मामला प्रशासन और शासन तक पहुंच चुका है, ऐसे में आने वाले दिनों में इस टकराव का असर प्रदेश स्तर पर देखने को मिल सकता है।

