गाजीपुर।
जिले में लावारिस शवों का अंतिम संस्कार करने और बेसहारा लोगों का इलाज कराने वाले समाजसेवी कुंवर विरेंद्र सिंह को मेडिकल कॉलेज में प्रवेश से प्रतिबंधित किए जाने के फरमान के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इस आदेश से सामाजिक कार्यकर्ताओं, छात्रों और आम नागरिकों में गहरा आक्रोश देखने को मिला।
कैसे भड़का विवाद?
सूत्रों के मुताबिक मेडिकल कॉलेज प्राचार्य प्रोफेसर आनंद मिश्रा ने अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को व्हाट्सएप ग्रुप पर यह निर्देश दिया कि “कुंवर विरेंद्र सिंह को अस्पताल में किसी भी कार्य हेतु प्रवेश न दिया जाए।”
यह आदेश आते ही क्षेत्र में विरोध की लहर दौड़ गई। लोगों का आरोप है कि विरेंद्र सिंह का काम प्राचार्य को पसंद नहीं आ रहा, जबकि वे वर्षों से निस्वार्थ भाव से लावारिस शवों का अंतिम संस्कार और बेसहारा मरीजों की सेवा कर रहे हैं।
सरजू पांडेय पार्क में प्रदर्शन
इस फरमान के खिलाफ गुरुवार को सामाजिक कार्यकर्ताओं, छात्रों और सरकारी कर्मचारियों ने सरजू पांडेय पार्क में विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने प्राचार्य पर “तुगलकी फरमान” जारी करने का आरोप लगाते हुए जमकर नारेबाजी की।
बाद में आक्रोशित भीड़ कलेक्ट्रेट परिसर पहुंची और डीएम को पत्रक सौंपकर कार्रवाई की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान बिगड़ी विरेंद्र सिंह की तबीयत
विरोध प्रदर्शन के बीच समाजसेवी कुंवर विरेंद्र सिंह अचानक अचेत हो गए। उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज किया गया। घटना ने मामले को और ज्यादा संवेदनशील बना दिया।
लोगों की प्रतिक्रियाएं
- सामाजिक कार्यकर्ता विवेक कुमार सिंह शम्मी ने कहा –
“विरेंद्र सिंह निस्वार्थ भाव से लावारिस शवों का दाह संस्कार कर रहे हैं। मुख्यमंत्री से लेकर कई बड़े नेताओं ने उनके काम को सम्मानित किया है। उन्हें रोकना अन्याय है।” - नगर पालिका परिषद के सभासद सोमेश नीरज राय ने कहा –
“यह आदेश प्राचार्य की तानाशाही का प्रमाण है। इससे समाज के बुद्धिजीवियों और आमजन में गहरा रोष है।” - पूर्व सभासद संजय सिंह ने चेतावनी देते हुए कहा –
“यदि इस मामले में ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो सामाजिक कार्यकर्ता और आमजन सड़क पर उतरकर बड़ा आंदोलन करने को विवश होंगे।”
कौन-कौन रहा मौजूद?
इस मौके पर छात्र नेता दीपक उपाध्याय, पूर्व प्रधान संजय राय उर्फ मंटू, समाजसेवी उमेश श्रीवास्तव, अनन्या सेवा ट्रस्ट के संस्थापक शशिकांत सिंह उर्फ गुड्डू, कंचन रावत, रीता विश्वकर्मा समेत कई लोग मौजूद रहे।
अब आगे क्या?
लोगों की मांग है कि प्राचार्य के आदेश की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और तुरंत कार्रवाई की जाए। यदि प्रशासन ने समय रहते कदम नहीं उठाया तो मामला बड़े जनांदोलन का रूप ले सकता है।

