Headlines

गाजीपुर में बयानबाज़ी तेज: काशीनाथ यादव का अफजाल अंसारी पर पलटवार

गाजीपुर। समाजवादी राजनीति में बयानबाज़ी का दौर एक बार फिर तेज हो गया है। सपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व एमएलसी काशीनाथ यादव ने सांसद अफजाल अंसारी के हालिया बयान पर तीखा पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि “पहले अफजाल अंसारी खुद त्याग करें, उसके बाद यदुवंशियों को नसीहत दें।”

श्रद्धांजलि सभा में दिया बयान

यह पूरा बयान पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वर्गीय कैलाश यादव की श्रद्धांजलि सभा के दौरान सामने आया। सभा को संबोधित करते हुए काशीनाथ यादव ने कहा कि यादव समाज ने अफजाल अंसारी को दो बार सांसद और कई बार विधायक बनाया है, इसलिए उन्हें समाज पर टिप्पणी करने से पहले आत्ममंथन करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव को मजबूत करने के लिए यादव समाज हमेशा बलिदान देने को तैयार रहा है और आगे भी रहेगा।

“अफजाल केवल सांसद, नेता नहीं”

पूर्व एमएलसी ने तीखे शब्दों में कहा कि अफजाल अंसारी केवल सपा के सांसद हैं, पार्टी के वैचारिक नेता नहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी पार्टी के प्रति निष्ठा हमेशा संदिग्ध रही है।

“वह कभी सपा में जाते हैं, कभी बसपा में, तो कभी अपना दल बना लेते हैं। पहले खुद स्थिरता दिखाएं, फिर दूसरों को सलाह दें।”

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वे चाहते हैं कि अफजाल अंसारी स्वस्थ रहें और यदि सपा में बने रहते हैं तो यादव समाज का समर्थन उन्हें मिलता रहेगा।

प्रतिनिधित्व पर भी उठाया सवाल

काशीनाथ यादव ने मऊ और गाजीपुर की 11 विधानसभा सीटों का हवाला देते हुए कहा कि वहां केवल एक ही यादव विधायक वीरेंद्र यादव हैं, जबकि अंसारी परिवार से एक सांसद और दो विधायक हैं।

उन्होंने कहा कि “पहले खुद बलिदान दें, फिर दूसरों को नसीहत दें।”

“पीडीए का नारा नया नहीं”

पीडीए (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) मुद्दे पर भी उन्होंने अपनी भूमिका याद दिलाई। उन्होंने कहा कि आज जो पीडीए का नारा दिया जा रहा है, वह 40 साल पहले अपने बिरहा गायन के माध्यम से इस विचार को उठा चुके थे।

उन्होंने बताया कि जब सवर्णों के खिलाफ आवाज उठाना आसान नहीं था, तब उनके इसी स्वाभिमान के कारण बसपा संस्थापक कांशीराम ने उन्हें एमएलसी बनाया था और बाद में सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव ने भी दो बार उन्हें यह जिम्मेदारी दी।

सम्मान और उपलब्धियां भी गिनाईं

काशीनाथ यादव ने कहा कि पूर्वांचल में पहली बार किसी एमएलसी को यश भारती सम्मान मिला और इलाहाबाद विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में भी उनके नाम से जुड़े प्रश्न पूछे जाते हैं।


राजनीतिक संकेत क्या हैं?

राजनीतिक जानकारों के अनुसार यह बयान पूर्वांचल की सियासत में यादव-अंसारी समीकरण और सपा के अंदरूनी शक्ति संतुलन की ओर इशारा करता है।

यह विवाद आने वाले समय में गाजीपुर-मऊ क्षेत्र की राजनीति पर असर डाल सकता है, खासकर तब जब पीडीए राजनीति को लेकर सपा में नई रणनीति बन रही है।
गाजीपुर में काशीनाथ यादव और अफजाल अंसारी के बीच बयानबाज़ी ने साफ कर दिया है कि सपा के भीतर नेतृत्व, प्रतिनिधित्व और सामाजिक समीकरण को लेकर तनाव अभी भी मौजूद है। आने वाले दिनों में यह विवाद और गहरा सकता है।

Don’t miss these tips!

We don’t spam! Read our privacy policy for more info.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *