गाजीपुर | The KN NEWS ब्यूरो
गाजीपुर की राजनीति में एक नाम बार-बार सुर्खियों में आता है — संतोष यादव। समाजवादी पार्टी से टिकट की जुगत में वर्षों से प्रयासरत संतोष यादव अब एक बार फिर से सियासी मैदान में उतरते नजर आ रहे हैं। इस बार निशाना है जंगीपुर विधानसभा। सवाल यह है कि क्या बार-बार सीट बदलने की रणनीति सियासी समझदारी है या अवसरवादी राजनीति का चेहरा?
🔁 सदर से शुरुआत, फिर गाजीपुर, अब जंगीपुर!
राजनीतिक यात्रा की शुरुआत सदर सीट से करने वाले संतोष यादव को वहां से सफलता नहीं मिली, लेकिन हार से सीखने के बजाय वे अगली बार गाजीपुर से टिकट की उम्मीद लगाने लगे। जब वहां भी समीकरण उनके पक्ष में नहीं बने, तो अब उन्होंने रुख किया है जंगीपुर विधानसभा का, जहां पहले से ही मजबूत संगठन और लोकप्रिय विधायक डॉ. वीरेंद्र यादव समाजवादी पार्टी का चेहरा हैं।
🤝 संतोष यादव की राजनीति: टिकट केंद्रित रणनीति
एक तरफ जहां राजनीति सेवा, विचार और जनसंपर्क पर आधारित होनी चाहिए, वहीं संतोष यादव की राजनीतिक यात्रा को देखने पर साफ समझ आता है कि उनकी प्राथमिकता सिर्फ ‘टिकट’ है, विचारधारा नहीं।न सदर से कोई ठोस संगठनात्मक योगदान, न गाजीपुर में कोई जनआंदोलन। पार्टी में सक्रियता का अभाव और समय-समय पर सीट बदलना यह दर्शाता है कि उनके पास न तो कोई दीर्घकालिक योजना है, न कोई मजबूत जनाधार।
🧭 क्या है जंगीपुर में एंट्री की रणनीति?
अब जबकि समाजवादी पार्टी में जंगीपुर सीट से डॉ. वीरेंद्र यादव सक्रिय हैं और पार्टी का जमीनी ढांचा बेहद मजबूत है, तो संतोष यादव की यहां एंट्री को ‘दबाव की राजनीति’ के रूप में देखा जा रहा है। कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल पार्टी नेतृत्व पर टिकट के लिए दवाब बनाने का प्रयास है।
🔍 संगठनात्मक कार्यकर्ताओं में नाराजगी
संतोष यादव की गतिविधियों को लेकर स्थानीय कार्यकर्ता बेहद नाराज हैं। उनका मानना है कि जो नेता हर बार सीट बदलकर केवल टिकट के लिए पार्टी में सक्रिय होते हैं, वो चुनाव के बाद जनता की सेवा या संगठन के साथ जुड़े नहीं रहते।
एक वरिष्ठ सपा कार्यकर्ता ने कहा –> “संगठन और संघर्ष के बिना अगर टिकट की उम्मीद है, तो पार्टी की विचारधारा का क्या होगा?”
❌ किसी एक क्षेत्र से नहीं जुड़ाव, न कोई समाजिक आंदोलन राजनीति केवल टिकट के लिए नहीं होती। क्षेत्र में सेवा, सामाजिक आंदोलन, और संगठनात्मक ताकत की जरूरत होती है। लेकिन संतोष यादव ने अभी तक किसी भी क्षेत्र में कोई स्थायी जनसंपर्क या जनसेवा कार्य नहीं किया। हर बार केवल टिकट की तलाश में नई सीट का चयन करना जनता की भावनाओं से खिलवाड़ है।
🧭 जंगीपुर में संतोष यादव के लिए कोई स्पेस नहीं?
जंगीपुर में पहले से ही समाजवादी पार्टी का संगठन सशक्त है, और डॉ. वीरेंद्र यादव की छवि एक ईमानदार, शिक्षित और जनहितैषी नेता की है।जनता भी जानती है कि कौन संघर्ष से नेता बना है और कौन केवल टिकट की आस में पार्टी कार्यालयों के चक्कर काट रहा है।
🎙️ सवाल यही है:
क्या संतोष यादव को खुद तय करना चाहिए कि राजनीति सेवा का माध्यम है या केवल ‘टिकट’ पाने की दौड़?
क्या पार्टी ऐसे नेताओं को प्रमोट करेगी जो संघर्ष नहीं करते, सिर्फ सीट बदलते रहते हैं?
क्या समाजवादी पार्टी नेतृत्व इस बात को समझेगा कि ऐसे टिकटार्थियों से कार्यकर्ताओं और जनता का विश्वास टूटता है?—
राजनीति में स्थायित्व, जनसेवा और विचारधारा सबसे अहम हैं।
बार-बार सीट बदलने और बिना संगठन के जमीन पर उतरने की राजनीति आज के दौर में टिकाऊ नहीं रही।
जंगीपुर की जनता और पार्टी कार्यकर्ता अब यह साफ कह रहे हैं
“संतोष यादव जी, अब बहुत हो गया!
राजनीति में टिकने के लिए सिर्फ टिकट नहीं,
जमीनी जुड़ाव और जनसमर्पण चाहिए
🖋️ रिपोर्टर: टीम KN NEWS📍 स्थान: गाजीपुर – जंगीपुर ।

