ग़ाज़ीपुर, कासिमाबाद – कासिमाबाद तहसील में एक गंभीर विवाद ने जन्म लिया है, जिसमें आरोप लगाया जा रहा है कि एंटी करप्शन टीम ने एक ईमानदार और साफ-सुथरी छवि वाले लेखपाल श्याम सुंदर को जबरदस्ती रिश्वत के आरोप में फंसाने की साजिश रची। इस मामले में लेखपाल के समर्थन में कासिमाबाद में करीब 50 लोग धरने पर बैठ गए हैं और वे आरोप लगा रहे हैं कि एंटी करप्शन टीम ने बिना किसी ठोस सबूत के श्याम सुंदर को झूठे आरोपों में फंसा दिया है।
क्या है पूरा मामला?
ग्राम पिपनार, थाना मरदह के रहने वाले चन्द्रजीत यादव ने श्याम सुंदर पर रिश्वत लेने का आरोप लगाया था। चन्द्रजीत यादव का कहना है कि श्याम सुंदर ने उनके काम के बदले 5000 रुपये की रिश्वत मांगी थी। जब यादव ने रिश्वत देने से इनकार किया, तो श्याम सुंदर ने उनके काम में जानबूझकर रुकावट डाल दी। इसके बाद चन्द्रजीत यादव ने एंटी करप्शन टीम को सूचित किया और श्याम सुंदर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई।
हालांकि, अब यह दावा किया जा रहा है कि एंटी करप्शन टीम इस पूरी घटना की मास्टरमाइंड है। धरने पर बैठे लोग यह आरोप लगा रहे हैं कि एंटी करप्शन टीम ने श्याम सुंदर को बिना किसी साक्ष्य के फंसाने के लिए यह साजिश रची और उन्हें रिश्वत के आरोप में गिरफ़्तार किया। उनका कहना है कि श्याम सुंदर की छवि एक ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ कर्मचारी की रही है, और ऐसा कोई भी कृत्य वह नहीं कर सकते थे।
लेखपाल का पक्ष
जब इस मामले पर श्याम सुंदर से प्रतिक्रिया ली गई, तो उन्होंने आरोपों को पूरी तरह से नकारा। श्याम सुंदर का कहना था, “यह आरोप पूरी तरह से झूठे हैं और मुझे जानबूझकर फंसाया जा रहा है। मैं हमेशा अपने कर्तव्यों को ईमानदारी से निभाता आया हूं और इस तरह के आरोप मेरे खिलाफ लगाए जाना सरासर गलत है।”
धरने और विरोध प्रदर्शन
कासिमाबाद तहसील में इस मामले को लेकर जबरदस्त विरोध प्रदर्शन हो रहा है। करीब 50 लोग धरने पर बैठ गए हैं और एंटी करप्शन टीम के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं। वे यह मांग कर रहे हैं कि अगर आरोप सही साबित होते हैं, तो श्याम सुंदर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, लेकिन अगर आरोप झूठे साबित होते हैं तो एंटी करप्शन टीम और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
धरने पर बैठे लोगों का कहना है कि यह मामला एक साजिश का हिस्सा हो सकता है, और श्याम सुंदर को जानबूझकर फंसाया जा रहा है। वे यह भी आरोप लगा रहे हैं कि एंटी करप्शन टीम के अधिकारियों ने एक ईमानदार कर्मचारी को बदनाम करने के लिए यह आरोप लगाए हैं, ताकि उनके खिलाफ सख्त कदम उठाया जा सके।
जांच की प्रक्रिया
इस पूरे मामले में एंटी करप्शन टीम ने जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से जांच की जाएगी, ताकि सच्चाई सामने आ सके। उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया है कि इस मामले में किसी निर्दोष व्यक्ति को परेशान नहीं किया जाएगा और ठोस सबूतों के आधार पर ही कार्रवाई की जाएगी।
कासिमाबाद का यह मामला अब एक गंभीर विवाद बन चुका है, जिसमें एक ओर जहां चन्द्रजीत यादव ने रिश्वत के आरोप लगाए हैं, वहीं दूसरी ओर श्याम सुंदर खुद को निर्दोष साबित करने की कोशिश कर रहे हैं। धरने पर बैठे लोग और स्थानीय लोग यह मानते हैं कि इस पूरे मामले के पीछे साजिश है और श्याम सुंदर को जानबूझकर फंसाया गया है। अब यह देखना होगा कि जांच के बाद सच सामने आता है या यह सिर्फ एक साजिश का हिस्सा था।

