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असम में एचएमपीवी संक्रमण की पुष्टि, डॉक्टरों का कहना है ‘साधारण वायरस’, चिंता की कोई बात नहीं

असम के डिब्रूगढ़ जिले के लाहोवाल स्थित आईसीएमआर-आरएमआरसी से मिली टेस्ट रिपोर्ट के बाद एचएमपीवी (ह्यूमन मेटाप neumovirus) संक्रमण की पुष्टि हुई है। अस्पताल के अधीक्षक ने बताया कि यह संक्रमण एक बच्चे में पाया गया, और अब वह स्थिति में स्थिर है।

उन्होंने कहा, “यह एक सामान्य वायरस है और इसमें चिंता की कोई बात नहीं है। यह वायरस फ्लू और इन्फ्लूएंजा संबंधित मामलों के परीक्षण के दौरान पाया गया।” उन्होंने यह भी बताया कि इन्फ्लूएंजा जैसे मामलों की जांच के लिए रोज़ाना आईसीएमआर को सैंपल भेजे जाते हैं, और इस बार भी यह एक सामान्य परीक्षण था, जिसमें एचएमपीवी संक्रमण का पता चला।

एचएमपीवी का पहला मामला

आईसीएमआर के क्षेत्रीय चिकित्सा अनुसंधान केंद्र, लाहोवाल (डिब्रूगढ़) के सीनियर वैज्ञानिक डॉ. बिष्वजीत बोरकाकोटी ने बताया कि 2014 से अब तक राज्य में एचएमपीवी के कुल 110 मामले सामने आ चुके हैं, और यह इस सीज़न का पहला मामला है। उन्होंने कहा, “हर साल यह वायरस पाया जाता है, और इसमें कुछ नया नहीं है। हमने यह सैंपल AMCH से प्राप्त किया था और यह एचएमपीवी के लिए सकारात्मक पाया गया।”

वायरस के लक्षण और उपचार

एचएमपीवी संक्रमण आमतौर पर हल्के श्वसन संबंधी लक्षणों का कारण बनता है, जैसे कि सर्दी, खांसी और हल्का बुखार। हालांकि, कुछ मामलों में यह वायरस कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले व्यक्तियों, जैसे छोटे बच्चों और बुजुर्गों के लिए खतरनाक हो सकता है। लेकिन डॉक्टरों के मुताबिक, इस वायरस के अधिकतर मामले गंभीर नहीं होते और उचित उपचार से इन्हें ठीक किया जा सकता है।

निष्कर्ष

एचएमपीवी संक्रमण असम में अब तक एक आम समस्या बन चुका है, लेकिन इसे लेकर चिंता की कोई बात नहीं है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने यह बताया कि यह एक सामान्य वायरस है और इसका उपचार संभव है। यदि किसी को हल्के सर्दी-खांसी जैसे लक्षण महसूस होते हैं, तो उन्हें डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए और अपना उपचार कराना चाहिए।

स्वास्थ्य अधिकारियों का यह भी कहना है कि इस वायरस के प्रति जागरूक रहकर और उचित देखभाल के साथ, लोग एचएमपीवी के संक्रमण से बच सकते हैं।

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