Headlines

प्रयागराज में महाकुंभ की भयानक भगदड़: टीवी चैनलों ने 12 घंटे बाद फिर से ‘बेहतरीन व्यवस्था’ का किया प्रचार

महाकुंभ भगदड़ के बाद 12 घंटे में टीवी समाचारों का चौंकाने वाला बदलाव: श्रद्धा से शोक और फिर ‘अडिग विश्वास’ तक

प्रयागराज (29 जनवरी 2025): महाकुंभ मेला, जो दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक है, हमेशा अपने अद्भुत दृश्य और आस्था से भरे आयोजनों के लिए जाना जाता है। लेकिन इस बार यह मेला एक भयंकर भगदड़ के कारण सुर्खियों में रहा, जिसने कई लोगों की जान ले ली और सैकड़ों को घायल कर दिया। इसके बावजूद, टीवी समाचार चैनलों ने घटना के महज 12 घंटे बाद फिर से श्रद्धालुओं की ‘अडिग विश्वास’ की तस्वीरें प्रसारित कीं। ये बदलाव न केवल चौंकाने वाला था, बल्कि यह मीडिया की संवेदनहीनता और प्रशासन की अव्यवस्था को भी उजागर करता है।

अमित शाह का ‘पवित्र स्नान’ और श्रद्धा का प्रदर्शन

सोमवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने प्रयागराज के त्रिवेणी संगम में स्नान किया। उनके इस धार्मिक कृत्य को टीवी चैनलों पर लाइव दिखाया गया, जिसमें उनका स्वागत, नाव यात्रा, पूजा और संतों से मुलाकात शामिल थी। यह दृश्य श्रद्धा और विश्वास से भरा था, और चैनल्स ने इसे बड़े ही धूमधाम से प्रसारित किया।

अगले ही दिन बुधवार सुबह, माघ मास की महाकुंभ स्नान के दौरान भगदड़ मच गई। लाखों श्रद्धालु संगम की ओर दौड़े, और इस दौरान कई लोगों की जान चली गई। भगदड़ में कई लोग घायल भी हुए। लेकिन हैरानी की बात यह है कि घटना के 12 घंटे बाद ही मीडिया ने फिर से वही श्रद्धा और विश्वास दिखाना शुरू कर दिया। “अडिग विश्वास” और “बेहतरीन व्यवस्था” जैसी बातें चैनलों पर फिर से प्रमुख हो गईं।

भगदड़ और उसके बाद की मीडिया रिपोर्टिंग

घटना के बाद, कुछ समय तक टीवी चैनलों ने भगदड़ के दृश्य और घायलों के बारे में रिपोर्ट की, लेकिन फिर मीडिया का रुख बदल गया। एक ओर जहां चैनल्स ने “तीन करोड़ श्रद्धालुओं ने सुबह 8 बजे तक स्नान किया”, “दस करोड़ लोग स्नान करने के लिए आएंगे, जो कुछ देशों की जनसंख्या से भी अधिक है” जैसी खबरें प्रसारित कीं, वहीं भगदड़ और मृतकों का जिक्र कहीं भी नहीं किया गया।

इसी बीच, प्रशासन और मीडिया के बीच जानकारी की कमी भी साफ नजर आई। उत्तर प्रदेश पुलिस ने बुधवार शाम को ही यह जानकारी दी कि 30 लोगों की मृत्यु हो चुकी है और 60 से अधिक घायल हैं। हालांकि, इस घटना के दौरान प्रशासन और मीडिया की ओर से कोई भी स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही थी।

प्रशासन की चुप्पी और मीडिया का रवैया

प्रशासन की चुप्पी पर सवाल उठना लाजिमी है। क्यों प्रशासन ने मृतकों की संख्या को छुपाया और घायलों की जानकारी नहीं दी? क्या यह इसलिए था कि कहीं सार्वजनिक भय और भारी भीड़ की वजह से व्यवस्था और सुरक्षा में और भी अधिक समस्याएं न उत्पन्न हो जाएं?

मीडिया ने भी इस चुप्पी का समर्थन किया और केवल श्रद्धालुओं की आस्था और व्यवस्था की तारीफ की। चैनल्स के रिपोर्टरों ने लगातार यह दावा किया कि “स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है”, “सब कुछ सामान्य हो गया है”, “जनता के बीच कोई घबराहट नहीं है”—जबकि घटनास्थल से वीडियो और तस्वीरें कुछ और ही कहानी बयान कर रही थीं।

अमित शाह का स्नान और मीडिया का धर्मनिरपेक्ष नजरिया

टीवी चैनलों पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का त्रिवेणी संगम में स्नान प्रसारित होना एक और चर्चा का विषय बन गया। क्या यह जरूरी था कि इस ‘पवित्र स्नान’ को लाइव दिखाया जाए? क्या इसे एक साधारण राजनीतिक उपस्थिति से ज्यादा महत्व दिया जाना चाहिए था? जब भगदड़ जैसी घटनाएं हो रही थीं, तो क्या यह समय नहीं था कि मीडिया प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए?

महाकुंभ मेला एक ओर जहां आस्था, श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक है, वहीं दूसरी ओर यह घटनाओं की संवेदनहीन रिपोर्टिंग और प्रशासन की अव्यवस्था को उजागर भी करता है। मीडिया ने घटना के बाद जल्दी ही “अडिग विश्वास” की तस्वीरें दिखानी शुरू कर दीं, जबकि असल में प्रशासन और सुरक्षा की खामियां स्पष्ट रूप से सामने आ रही थीं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या मीडिया का यह दृष्टिकोण सही है, या इसे आलोचनात्मक और पारदर्शी रिपोर्टिंग की आवश्यकता है, जो जनता को सही जानकारी प्रदान करे और प्रशासन से जवाबदेही की मांग करे?

Don’t miss these tips!

We don’t spam! Read our privacy policy for more info.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *