गाजीपुर, यूपी – पत्रकारिता की स्वतंत्रता के लिए एक बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा मामला अब नया मोड़ ले चुका है। हाईकोर्ट प्रयागराज से पत्रकार विवेक यादव की गिरफ्तारी पर रोक लगने के बाद, जब वे गाजीपुर जनपद वापस लौटे, तो उनका भव्य स्वागत किया गया। स्थानीय लोगों, समर्थकों और पत्रकारों ने उनका फूल-मालाओं से अभिनंदन किया और इसे सच्चाई की जीत करार दिया।
क्या है पूरा मामला?
पत्रकार विवेक यादव के खिलाफ गाजीपुर के करंडा थाना क्षेत्र में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 की धारा 217, 352 और 351(3) के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। विवेक यादव ने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया था कि उनके पिता को जबरन घर से उठा लिया गया और नामांकन वापस लेने के लिए मजबूर किया गया।
जब उन्होंने इस घटना पर सवाल उठाया और कार्रवाई की मांग की, तो प्रशासन ने उल्टा उनके ही खिलाफ मुकदमा दर्ज कर दिया। इसके बाद, उन्होंने हाईकोर्ट प्रयागराज में याचिका दायर कर न्याय की गुहार लगाई।
हाईकोर्ट का फैसला
प्रयागराज हाईकोर्ट ने गाजीपुर पुलिस को गिरफ्तारी पर रोक लगाने का निर्देश दिया, जिससे पत्रकार जगत में खुशी की लहर दौड़ गई। विवेक यादव ने इसे सच्चाई की जीत बताया और कहा कि यह फैसला स्वतंत्र पत्रकारिता और लोकतंत्र की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
गाजीपुर में जोरदार स्वागत
गाजीपुर वापस लौटने पर विवेक यादव का फूल-मालाओं, जयघोष और ढोल-नगाड़ों के साथ भव्य स्वागत किया गया। समर्थकों ने उन्हें न्याय और सच्चाई की आवाज बताते हुए उनके संघर्ष की सराहना की।
पत्रकार संगठनों की प्रतिक्रिया
वरिष्ठ पत्रकारों का कहना है कि यह एक संकेत है कि सच्चाई को दबाया नहीं जा सकता।
सोशल मीडिया पर लोगों ने इसे लोकतंत्र की जीत करार दिया और न्यायपालिका की सराहना की।
विवेक यादव का बयान
गाजीपुर पहुंचने के बाद विवेक यादव ने कहा,
“यह सिर्फ मेरी लड़ाई नहीं थी, बल्कि हर उस पत्रकार की लड़ाई थी, जो सच के साथ खड़ा है। हाईकोर्ट का यह आदेश न्याय और लोकतंत्र की जीत है। मैं उन सभी लोगों का आभार व्यक्त करता हूँ, जिन्होंने मेरा समर्थन किया।”
अब आगे क्या?
इस फैसले के बाद अब यह देखना होगा कि प्रशासन अगला कदम क्या उठाएगा। क्या विवेक यादव के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द किया जाएगा या फिर यह कानूनी लड़ाई आगे भी जारी रहेगी?

