Headlines

वक्फ संशोधन विधेयक 2025: उत्तर प्रदेश में 98% वक्फ संपत्तियों पर संकट

लखनऊ, 3 अप्रैल 2025
लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक 2025 पारित होने के बाद उत्तर प्रदेश की वक्फ संपत्तियों पर गंभीर संकट मंडरा रहा है। इस संशोधित कानून के लागू होते ही 98% वक्फ संपत्तियां, जो अब तक राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नहीं थीं, सीधे तौर पर जिलाधिकारियों के अधिकार क्षेत्र में आ जाएंगी। इस कानून के तहत अब वक्फ बोर्ड नहीं, बल्कि जिलाधिकारी इन संपत्तियों से जुड़े मामलों पर निर्णय लेंगे।

क्या है नया संशोधन?

नए कानून के तहत वक्फ बोर्डों द्वारा दावा की गई 57,792 सरकारी संपत्तियों को उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर कर दिया गया है। इन संपत्तियों का कुल रकबा 11,712 एकड़ है। अब स्थानीय प्रशासन इन संपत्तियों पर सीधे कब्जा ले सकता है।

वक्फ संपत्तियों पर कब्जे का विवाद

उत्तर प्रदेश में लंबे समय से वक्फ संपत्तियों को लेकर विवाद चल रहा था। सरकारी रिपोर्टों के अनुसार, वक्फ बोर्डों ने कई सार्वजनिक और निजी संपत्तियों को भी वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज कर लिया था। रामपुर, हरदोई समेत कई जिलों में ऐसी जमीनों पर अवैध कब्जे की शिकायतें थीं।

शत्रु संपत्तियां भी वक्फ के रूप में दर्ज

राज्य के कई जिलों में शत्रु संपत्तियों को भी वक्फ के रूप में दर्ज कर लिया गया था। अब नए कानून के तहत इन्हें वापस लेना आसान हो जाएगा। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, शिया और सुन्नी वक्फ बोर्ड के रिकॉर्ड में कुल 1,32,140 संपत्तियां वक्फ के रूप में दर्ज हैं, लेकिन इनमें से केवल 2,528 संपत्तियां ही राजस्व रिकॉर्ड में वैध रूप से दर्ज हैं। संशोधित कानून के बाद अन्य संपत्तियों को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज कराने की प्रक्रिया बेहद जटिल हो जाएगी।

उत्तर प्रदेश के प्रमुख जिलों में वक्फ संपत्तियां

संशोधन विधेयक से राज्य के 75 जिलों में वक्फ संपत्तियों पर बड़ा असर पड़ने वाला है। सबसे अधिक प्रभावित जिलों में शामिल हैं:

  • लखनऊ: 368 संपत्तियां
  • रामपुर: 2,363 संपत्तियां
  • शाहजहांपुर: 2,371 संपत्तियां
  • फतेहपुर: 1,610 संपत्तियां
  • आजमगढ़: 1,575 संपत्तियां
  • मेरठ: 1,154 संपत्तियां
  • सहारनपुर: 1,497 संपत्तियां
  • बरेली: 2,000 संपत्तियां
  • वाराणसी: 406 संपत्तियां

क्या होगा अगला कदम?

संशोधित कानून लागू होने के बाद सरकार को स्थानीय प्रशासन के माध्यम से इन संपत्तियों का पुनः सर्वेक्षण कराना होगा। जिलाधिकारी अब इन मामलों की समीक्षा करेंगे और 1952 के राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर निर्णय लेंगे।

विपक्षी दलों और अल्पसंख्यक संगठनों ने इस संशोधन का विरोध किया है, जबकि सरकार का कहना है कि यह कदम सरकारी और निजी संपत्तियों को अवैध रूप से वक्फ में दर्ज करने की प्रक्रिया पर रोक लगाएगा।

वक्फ संशोधन विधेयक 2025 के प्रभाव से उत्तर प्रदेश में वक्फ संपत्तियों की कानूनी स्थिति में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। इस नए कानून से न केवल वक्फ बोर्ड की शक्तियां सीमित हो जाएंगी, बल्कि सरकारी संपत्तियों को वापस पाने की प्रक्रिया भी आसान हो जाएगी। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस विधेयक के प्रभाव में राज्य सरकार और वक्फ बोर्डों के बीच क्या कानूनी लड़ाई चलती है।

Don’t miss these tips!

We don’t spam! Read our privacy policy for more info.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *