गाजीपुर, उत्तर प्रदेश – बदलते समय और आधुनिक तकनीक के साथ, भारतीय कृषि क्षेत्र भी तेजी से विकास की ओर अग्रसर हो रहा है। अब परंपरागत कृषि तरीकों के स्थान पर आधुनिक कृषि यंत्रों और मशीनों का उपयोग बढ़ता जा रहा है, जिससे किसानों की मेहनत और समय दोनों की बचत हो रही है। खेती और बागवानी में इन कृषि यंत्रों की भूमिका अब केवल सहायक नहीं, बल्कि अनिवार्य होती जा रही है।
तकनीक का खेती में प्रवेश
हाल ही में चंवर ग्राम में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद अटारी कानपुर और अंतर्राष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (आईआरआरआई) दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों और यंत्रों की उपयोगिता के बारे में विस्तार से बताया गया।
परिषद के निदेशक डॉ. शांतनु कुमार दुबे ने कहा कि आज के समय में खेती को अधिक उत्पादक और कम खर्चीला बनाने के लिए कृषि यंत्रों का उपयोग अत्यंत आवश्यक हो गया है। उन्होंने बताया कि खेत की जुताई, बुआई, सिंचाई और कटाई से लेकर भंडारण तक में मशीनों की सहायता से न केवल समय की बचत होती है, बल्कि फसल की गुणवत्ता और उत्पादकता में भी वृद्धि होती है।
जीरो टिलेज सीड ड्रिल मशीन का महत्व
डॉ. दुबे ने विशेष रूप से जीरो टिलेज सीड ड्रिल मशीन का उल्लेख किया। यह मशीन बिना खेत की जुताई किए ही सीधे बीज की बुआई कर सकती है। इसे ‘बिना जुताई के सीधी बुआई’ की विधि भी कहा जाता है। इस तकनीक से जहां किसानों की मेहनत कम होती है, वहीं सिंचाई और बीज की आवश्यकता भी घटती है। इसके अतिरिक्त उत्पादन में 20 से 25 प्रतिशत तक की वृद्धि देखी गई है। एक हेक्टेयर क्षेत्र में धान और गेहूं की खेती पर किसानों को लगभग ₹3500 से ₹4000 तक की बचत होती है।
किसानों को मिल रहा लाभ
इस कार्यक्रम में डॉ. सुधांशु सिंह, डॉ. आरके मलिक, डॉ. जयप्रकाश, डॉ. बीपी सिंह सहित कई कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों से संवाद किया और उन्हें तकनीकी ज्ञान प्रदान किया। किसानों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया और नई तकनीकों को अपनाने की इच्छा जताई।
किसान अमरजीत सिंह ने बताया, “पहले खेत की जुताई में ही पूरा दिन निकल जाता था, अब मशीनों से दो घंटे में काम हो जाता है। इससे हम ज्यादा खेतों में खेती कर पा रहे हैं।”
आज के युग में जब जलवायु परिवर्तन, भूमि की कमी और श्रम की समस्या जैसे मुद्दे सामने हैं, तब कृषि यंत्र किसानों के लिए एक वरदान साबित हो रहे हैं। यह आवश्यक है कि सरकार और कृषि संस्थान मिलकर इन यंत्रों को अधिक सुलभ और सस्ते दामों पर किसानों को उपलब्ध कराएं, ताकि देश का कृषि क्षेत्र और अधिक मजबूत और आत्मनिर्भर बन सके।

