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इटावा में शर्मनाक घटना: ब्राह्मण न होने पर भगवताचार्य की पिटाई, चोटी काटी, सिर मुड़वाया, नाक रगड़वाई; 5 घंटे तक बनाया बंधक

इटावा, उत्तर प्रदेश | 24 जून 2025 | संवाददाता – The KN News

उत्तर प्रदेश के इटावा जिले से मानवता को झकझोर देने वाली एक अमानवीय घटना सामने आई है। इटावा के महेवा ब्लॉक के दांदरपुर गांव में एक भगवताचार्य मुकट मणी (मुक्त सिंह) और उनके दो सहयोगियों को सिर्फ इसलिए बेरहमी से पीटा गया क्योंकि वह जन्म से ब्राह्मण नहीं थे। मामला जातीय अहंकार, धार्मिक असहिष्णुता और सामाजिक भेदभाव का वीभत्स उदाहरण बनकर सामने आया है।

क्या है पूरा मामला?

शनिवार की रात दांदरपुर गांव में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन हुआ था। इस धार्मिक अनुष्ठान के लिए मुकट मणी, निवासी सिविल लाइन थाना क्षेत्र, बतौर व्यास (कथावाचक) आमंत्रित किए गए थे। उनके साथ दो अन्य सहयोगी — संत सिंह यादव (कानपुर देहात) और श्याम सिंह कठेरिया (अछल्दा) भी थे।

कार्यक्रम के समापन के बाद गांव में चर्चा फैल गई कि कथावाचक ब्राह्मण नहीं हैं, बल्कि किसी अन्य जाति से हैं। इसी खबर से ग्रामीणों में उबाल आ गया और देखते ही देखते धार्मिक श्रद्धा की जगह अंधविश्वास और जातीय घृणा ने ले ली।

पांच घंटे की बंधक यातना: चोटी काटी, नाक रगड़वाई, पैर छुवाए

ग्रामीणों ने कथावाचक मुकट मणी और उनके दोनों सहयोगियों को लगभग पांच घंटे तक बंधक बनाकर रखा। इस दौरान मुकट मणी की चोटी काट दी गई, उनका सिर जबरन मुड़वाया गया, और गांव के लोगों के सामने नाक रगड़वाकर माफ़ी मंगवाई गई। इतना ही नहीं, दोनों सहयोगियों को भी अपमानित किया गया और ग्रामीणों के पैरों में झुकाकर क्षमा मांगने को मजबूर किया गया।

लूट का भी आरोप: ₹25,000 नकद, चेन और अंगूठी छीनी

मुकट मणी ने आरोप लगाया है कि इस पूरे घटनाक्रम के दौरान उनसे ₹25,000 नगद, एक चेन और अंगूठी भी लूट ली गई। इसके अतिरिक्त उनकी बाइक की हवा निकालकर अपमानजनक तरीके से दोबारा भरवाई गई।

घटना का वीडियो वायरल, पुलिस हरकत में

इस बर्बरता का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही प्रशासन में खलबली मच गई। सोमवार को मुकट मणी समाजवादी पार्टी के सांसद जितेंद्र दोहरे, विधायक राघवेंद्र गौतम और सपा जिलाध्यक्ष प्रदीप शाक्य के साथ एसएसपी ब्रजेश श्रीवास्तव से मिले। उनके निर्देश पर चार नामजद और 50 अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज किया गया।

गिरफ्तारी और पुलिस की कार्रवाई

इटावा पुलिस ने निक्की अवस्थी (30), उत्तम अवस्थी (18), आशीष तिवारी (21), प्रथम दुबे उर्फ मनु दुबे (24) को गिरफ्तार किया है। सभी आरोपी दांदरपुर गांव के ही निवासी हैं। एसएसपी श्रीवास्तव ने कहा कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

सामाजिक प्रतिक्रिया और धर्माचार्य संगठनों का आक्रोश

इस घटना को लेकर धार्मिक और सामाजिक संगठनों में आक्रोश फैल गया है। कई धर्माचार्यों ने इसे “सनातन धर्म की परंपरा पर कलंक” बताया है। उनका कहना है कि कथावाचन का धर्म और ज्ञान जाति से नहीं, श्रद्धा और अध्ययन से तय होता है।

“जातिगत भेदभाव की आड़ में धर्म के ठेकेदारों ने जिस तरह से भगवान के नाम पर अपमान की सारी सीमाएं पार की हैं, वह शर्मनाक है,” — एक स्थानीय धर्माचार्य ने कहा।

राजनीतिक रंग भी लेने लगा मामला

घटना को लेकर विपक्षी दलों ने भी भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। सपा प्रवक्ताओं ने इसे “जातीय उत्पीड़न की चरम सीमा” करार दिया और मामले में SC/ST एक्ट के तहत कार्रवाई की मांग की है। वहीं प्रशासन फिलहाल मामले को संतुलित और निष्पक्ष तरीके से निपटाने की बात कह रहा है।


सिर्फ एक कथावाचक की बेइज्जती नहीं, समाज की चेतना पर हमला है

दांदरपुर की यह घटना भारत की उस सामाजिक सच्चाई को उजागर करती है जो आज भी जाति के नाम पर लोगों की इज्जत, आस्था और अधिकारों का हनन कर रही है। एक धार्मिक अनुष्ठान को अराजकता में बदल देना इस बात का प्रमाण है कि जातिगत शुद्धता की सोच आज भी हमारे समाज में ज़हरीले रूप में जीवित है।

The KN News इस घटना की कड़ी निंदा करता है और प्रशासन से मांग करता है कि दोषियों को कठोर सजा दी जाए ताकि भविष्य में कोई भी धार्मिक मंच पर जाति के चश्मे से न देखा जाए।

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