**गाजीपुर |
गाजीपुर जिला कारागार में बुधवार को एक बंदी की संदिग्ध परिस्थितियों में तबीयत बिगड़ने के बाद मौत हो गई। मृतक की पहचान भुड़कुड़ा कोतवाली क्षेत्र के कौला जखनिया निवासी *सुनील राजभर (26)* के रूप में हुई है, जो पिछले डेढ़ वर्ष से दहेज हत्या के मामले में न्यायिक हिरासत में बंद था। इस घटना के बाद परिजनों में कोहराम मच गया है और जेल प्रशासन पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
📌 क्या है मामला?
बताया जा रहा है कि बुधवार सुबह करीब 8:45 बजे सुनील की तबीयत अचानक खराब हो गई। साथी बंदियों ने जब यह देखा तो उन्होंने तत्काल जेल प्रशासन को जानकारी दी। जेल कर्मियों ने डॉक्टर को बुलाया और डॉक्टर ने प्राथमिक जांच के बाद सुनील की हालत को गंभीर बताते हुए उसे तुरंत जिला अस्पताल ले जाने की सलाह दी। आनन-फानन में सुनील को मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
🏥 पहले भी थी तबीयत खराब
जेल अधीक्षक जगदंबा प्रसाद दुबे के अनुसार, दो दिन पहले भी सुनील को चक्कर आने की शिकायत हुई थी, जिसके बाद उसे जेल में ही प्राथमिक उपचार दिया गया था। उपचार के बाद उसकी तबीयत में सुधार भी आया था। लेकिन बुधवार सुबह करीब 9:45 बजे उसे सांस लेने में तकलीफ हुई, जिसके बाद उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां उसने दम तोड़ दिया।
🧑⚖️ परिजनों ने जताई नाराजगी, मौत पर जताया शक
जैसे ही सुनील की मौत की सूचना परिजन और परिवार को मिली, वह रोते-बिलखते अस्पताल पहुंचे। परिजनों का कहना है कि सुनील की हालत कुछ दिन पहले तक बिल्कुल सामान्य थी। उन्होंने कहा कि हाल ही में हुई पेशी के दौरान सुनील ने माता-पिता से 10 मिनट तक बातचीत भी की थी और तब वह बिल्कुल स्वस्थ था।
सुनील की मां ने रोते हुए कहा,
“बेटा कह रहा था कि मैं जल्द घर लौटूंगा… कौन जानता था कि वो आखिरी बार मिल रहा है। हमें बताया ही नहीं गया कि उसकी हालत कितनी बिगड़ गई थी। अगर पहले से पता होता तो हम कुछ कर सकते थे।”
⚖️ पोस्टमार्टम और जांच की प्रक्रिया शुरू
पुलिस द्वारा पंचनामा की कार्रवाई के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। प्रशासनिक स्तर पर कहा गया है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही असली वजह सामने आ पाएगी। वहीं, परिजनों ने मांग की है कि मजिस्ट्रेटी जांच कराई जाए ताकि सुनील की मौत के पीछे की सच्चाई सामने आ सके।
👥 गांव में पसरा मातम, ग्रामीणों ने भी जताई चिंता
घटना की सूचना मिलते ही मृतक के गांव कौला में शोक की लहर दौड़ गई। बड़ी संख्या में ग्रामीण सुनील के घर पहुंचे और परिजनों को सांत्वना देने लगे। ग्रामीणों का भी कहना है कि सुनील जेल जाने से पहले एकदम स्वस्थ और सामान्य युवक था। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि जेल की स्वास्थ्य सेवाओं की जांच होनी चाहिए।
📌 मुख्य बिंदु संक्षेप में:
- सुनील राजभर (26) दहेज हत्या के मामले में डेढ़ वर्ष से जेल में बंद था।
- दो दिन पहले चक्कर आने की शिकायत पर जेल में उपचार हुआ था।
- बुधवार सुबह सांस लेने में दिक्कत के बाद मेडिकल कॉलेज लाया गया, जहां मौत हो गई।
- परिजनों ने जताई नाराजगी, कहा- पेशी पर सुनील बिल्कुल ठीक था।
- शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया, जांच प्रक्रिया शुरू।
- ग्रामीणों और परिजनों ने निष्पक्ष जांच की मांग की।
📣 क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि किसी भी कैदी की कस्टडी में मृत्यु अपने आप में एक गंभीर विषय है और इसके पीछे की वजह की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
“अगर किसी बंदी की मौत स्वास्थ्य संबंधी लापरवाही के चलते होती है तो यह जेल प्रशासन की जवाबदेही बनती है,” — एक स्थानीय अधिवक्ता ने कहा।
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The KN News अपडेटेड 10 जुलाई 2025

