गाजीपुर, 21 जुलाई 2025
उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के नंदगंज कस्बे में छह महीने पहले हुई किन्नर की हत्या के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। मुख्य आरोपी अजय राम के खिलाफ अब राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत कार्रवाई की गई है।
यह घटना 29 दिसंबर 2024 को हुई थी, जब गंगा किन्नर उर्फ हर्ष उपाध्याय की दिनदहाड़े बाजार की एक कपड़े की दुकान में घुसकर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। आरोपी ने गंगा किन्नर पर चार गोलियां चलाई थीं, जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई थी।
हत्या के पीछे वर्चस्व की लड़ाई
पुलिस के अनुसार, इस हत्या के पीछे किन्नर समुदाय में आपसी वर्चस्व की लड़ाई थी। गंगा किन्नर क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत कर रही थीं, जिससे कुछ पुराने किन्नर और उनके समर्थकों को विरोध था। इसी के चलते हत्या की साजिश रची गई।
इस मामले में कुल छह लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था, जिनमें चार वयस्क और दो नाबालिग शामिल हैं। आरोपी हैं:
अजय राम (सबुआ, करंडा),
मिथिलेश यादव (हकीमपुर, नंदगंज),
रानी किन्नर (पारसपुर बुढ़ानपुर, भुड़कुड़ा),
राहुल चौहान उर्फ किशन उर्फ सूरज (सिकरौल पोखरा, वाराणसी),
और दो किशोर।
पुलिस ने 3 जनवरी से 30 जनवरी 2025 के बीच सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
NSA की कार्रवाई क्यों?
गाजीपुर के पुलिस अधीक्षक डॉ. ईरज राजा ने बताया कि इस हत्याकांड से नंदगंज बाजार में भय और अराजकता का माहौल बन गया था। लोग घरों से बाहर निकलने में डरने लगे थे। दुकानों, स्कूलों और कॉलेजों पर इसका गहरा असर पड़ा था।
सार्वजनिक शांति को बनाए रखने और अपराध को गंभीरता से देखते हुए मुख्य आरोपी अजय राम पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत कार्रवाई की गई है। इसके तहत आरोपी को बिना ज़मानत लंबे समय तक जेल में रखा जा सकता है।
इलाके में अब शांति, लेकिन सवाल बाकी
इस घटना के बाद पुलिस और पीएसी की लगातार गश्त और सख्ती से इलाके में अब सामान्य स्थिति लौट आई है, लेकिन लोगों के मन में डर और असुरक्षा की भावना अभी भी बनी हुई है।
कई लोगों का कहना है कि किन्नर समुदाय की आंतरिक राजनीति अब हिंसक रूप ले रही है, जिस पर प्रशासन को विशेष ध्यान देना होगा।
गाजीपुर का यह किन्नर हत्याकांड सिर्फ एक व्यक्ति की हत्या नहीं, बल्कि समाज में बढ़ रही असहिष्णुता, आपसी संघर्ष और कानून व्यवस्था की चुनौती को भी सामने लाता है। NSA की कार्रवाई से यह संदेश जरूर गया है कि अपराध कितना भी संगठित हो, कानून से बचना आसान नहीं है।
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