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परमवीर हवलदार अब्दुल हमीद : दुश्मन के छक्के छुड़ाने वाले जांबाज, आज है शहादत दिवस

गाजीपुर/नई दिल्ली।
आज का दिन भारतीय सैन्य इतिहास में स्वर्णाक्षरों में लिखा हुआ है। 10 सितंबर 1965 को खेमकरण सेक्टर में अपने अदम्य साहस और पराक्रम का परिचय देते हुए परमवीर चक्र से अलंकृत हवलदार अब्दुल हमीद शहीद हो गए थे। पाकिस्तान के अमेरिकी पैटन टैंकों के घमंड को तोड़ते हुए उन्होंने न केवल दुश्मन की सेना को ध्वस्त किया बल्कि पूरी दुनिया को दिखा दिया कि भारतीय सैनिक किसी भी आधुनिक हथियार से बड़ा जज्बा और हौसला रखते हैं।

पैटन टैंकों के आगे “मौत का देवदूत” बने अब्दुल हमीद

1965 की जंग से पहले पाकिस्तान को अमेरिका से पैटन टैंक मिले थे, जिन्हें उस दौर का सबसे आधुनिक और लगभग अजेय हथियार माना जाता था। इन टैंकों के दम पर पाकिस्तानी सेना ने खेमकरण सेक्टर के असल उत्तर गांव की ओर बढ़त बनानी शुरू की। भारतीय सेना के पास न टैंक थे और न ही कोई भारी हथियार। सिर्फ साधारण रायफलें और मशीन गन।

ऐसे हालात में हवलदार अब्दुल हमीद अपनी गन-माउंटेड जीप के साथ मोर्चे पर उतरे। इस जीप पर लगी एंटी-टैंक गन को पैटन टैंकों के मुकाबले खिलौना समझा जा रहा था। लेकिन हमीद ने अपने साहस और बुद्धिमत्ता से पैटन टैंकों की कमजोर नस पहचान ली और एक-एक कर सात टैंकों को ध्वस्त कर दिया।

असल उत्तर बना पैटन टैंकों की कब्रगाह

अब्दुल हमीद के साहस से पाकिस्तान की सेना में भगदड़ मच गई। असल उत्तर गांव देखते ही देखते पैटन टैंकों की कब्रगाह में बदल गया। लेकिन इसी लड़ाई के दौरान उनकी जीप पर एक गोला आ गिरा और वे गंभीर रूप से घायल हो गए। वीरगति को प्राप्त होने तक उन्होंने भारतीय सेना की ढाल बनकर लड़ाई लड़ी।

परमवीर चक्र से सम्मानित

उनके अदम्य साहस और बलिदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें मरणोपरांत परमवीर चक्र, देश का सर्वोच्च सैन्य सम्मान, प्रदान किया।

धामुपुर का वीर सपूत

अब्दुल हमीद का जन्म 1 जुलाई 1933 को उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के छोटे से गांव धामुपुर में हुआ था। उनके पिता मोहम्मद उस्मान एक साधारण किसान परिवार से थे। लेकिन अब्दुल हमीद ने अपने पराक्रम से गांव, गाजीपुर और पूरे भारत का गौरव बढ़ाया।

शहादत को नमन

आज उनका शहादत दिवस है। पूरा देश इस महान वीर को नमन कर रहा है। शहीदों की शौर्य गाथा सदियों तक प्रेरणा देती है और हवलदार अब्दुल हमीद का नाम हमेशा भारतीय सैनिकों के साहस का प्रतीक रहेगा।

कोटि-कोटि नमन — वीर शहीद हवलदार अब्दुल हमीद को।

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