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गाजीपुर: मुख्यमंत्री के आदेशों को नजरअंदाज कर रहे बीडीओ, अधिकारियों की कार्यशैली पर उठ रहे सवाल

गाजीपुर: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा प्रदेश के सभी अधिकारियों को सीयूजी (क्लोज्ड यूजर ग्रुप) नंबर पर आने वाली हर कॉल को उठाने और जनसमस्याओं का शीघ्र निस्तारण करने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि, जिले के एक प्रमुख अधिकारी, बीडीओ देवकली, मुख्यमंत्री के इन निर्देशों को नजरअंदाज करते हुए दिखे हैं। उनकी कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं, खासकर तब जब एक पत्रकार ने कई बार फोन करने के बावजूद उनसे संपर्क नहीं किया।

7 फरवरी को पत्रकार ने बीडीओ देवकली के सीयूजी नंबर 9454465247 पर कई बार कॉल किया, लेकिन वह कोई जवाब नहीं मिला। सुबह 10:48 बजे, 11:07 बजे, 11:13 बजे और फिर 12:06 बजे फोन करने के बावजूद बीडीओ ने कॉल का उत्तर नहीं दिया। इसके अलावा, बीते 3 फरवरी को भी पत्रकार ने 11:47 बजे कॉल किया, लेकिन बीडीओ साहब ने फोन काट दिया और कॉल बैक भी नहीं किया। चौबीस घंटे से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन अब तक उन्होंने कॉल बैक भी नहीं किया।

यह घटना मुख्यमंत्री के आदेशों के खिलाफ एक उदाहरण प्रस्तुत करती है, जो आम जनता और मीडिया के प्रति अधिकारी की जिम्मेदारी को नकारती है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से निर्देशित किया था कि अधिकारी जनता की समस्याओं का समाधान तत्परता से करें, और अगर वे फोन नहीं उठा सकते तो कॉल बैक करें। लेकिन बीडीओ का इस प्रकार का व्यवहार यह दर्शाता है कि वह इन आदेशों को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं।

सीयूजी नंबर का मुख्य उद्देश्य यही है कि जनता किसी भी समय किसी भी अधिकारी से सीधा संपर्क कर अपनी समस्याएं सुलझा सके। लेकिन अगर अधिकारी ही अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाते, तो यह आम जनता के लिए किस हद तक असुविधाजनक हो सकता है, यह समझना मुश्किल नहीं है। जब पत्रकार जैसी जिम्मेदार संस्था का फोन नहीं उठाया जा रहा है, तो आम लोगों का हाल क्या होगा?

अधिकारियों के ऐसे व्यवहार से सवाल उठता है कि क्या मुख्यमंत्री के निर्देश केवल कागजों तक सीमित रह गए हैं, या इन निर्देशों का सही पालन नहीं हो पा रहा है। अब देखना यह होगा कि इस मामले में उच्च अधिकारी क्या कार्रवाई करते हैं और क्या बीडीओ देवकली को मुख्यमंत्री के आदेशों का पालन करने के लिए मजबूर किया जाएगा या यह मामला इसी तरह दबा रहेगा।

यह घटना गाजीपुर जिले में प्रशासनिक सुधारों की आवश्यकता को भी उजागर करती है, ताकि अधिकारियों को उनकी जिम्मेदारी का एहसास हो सके और वह जनता के प्रति अपनी सेवा में तत्पर रहें।

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