गाजीपुर, उत्तर प्रदेश – पूर्व सांसद और जन अधिकार पार्टी के नेता पप्पू यादव को 30 साल पुराने आचार संहिता उल्लंघन मामले में राहत मिली है। शनिवार को एमपी-एमएलए कोर्ट ने उनके खिलाफ दायर अपील को खारिज कर दिया।
क्या था पूरा मामला?
यह घटना 8 नवंबर 1993 की है, जब पप्पू यादव और उमेश पासवान बिहार के बक्सर से गाजीपुर जा रहे थे। मुहम्मदाबाद के शहनिंदा चौकी पर पुलिस ने उनके काफिले को रोक लिया। इसके विरोध में उन्होंने अपने समर्थकों के साथ सड़क पर जाम लगाकर प्रदर्शन किया। इस पर तत्कालीन थानाध्यक्ष वीपी सिंह ने उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था।
कोर्ट ने किया बरी
इस मामले में जुलाई 2023 में सीजीएम कोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया था। हालांकि, 6 सितंबर 2023 को जिला जज की अदालत में इस फैसले के खिलाफ अपील दायर की गई थी, जिसे बाद में एमपी-एमएलए कोर्ट को सौंप दिया गया। अब कोर्ट ने इस अपील को भी खारिज कर दिया, जिससे पप्पू यादव को राहत मिली है।
पप्पू यादव का बयान
कोर्ट से बाहर आने के बाद पप्पू यादव ने मीडिया से बातचीत में कहा कि “भाजपा सरकार नीतीश कुमार और नायडू की बैसाखी के सहारे चल रही है। भाजपा और जदयू का गठबंधन ‘बेमेल शादी’ जैसा है, जिसकी विचारधारा कभी नहीं मिल सकती।”
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि “ईडी, सीबीआई, चुनाव आयोग और उद्योगपति अडानी के बिना भाजपा चुनाव नहीं जीत सकती।”
कुंभ मेले को लेकर दिया बयान
उन्होंने कुंभ मेले को लेकर भी एक विवादित बयान दिया। पप्पू यादव ने कहा कि “बाबाओं को कुंभ में नहीं आना चाहिए क्योंकि यह गरीब लोगों के लिए है, जिनकी आस्था पर भरोसा है।” उन्होंने प्रशासन पर भी आरोप लगाया कि “कुंभ के दौरान हुई मौतों की सही संख्या को छिपाया जा रहा है।”
पप्पू यादव को 30 साल पुराने मामले में कोर्ट से राहत मिल गई है, लेकिन उनके राजनीतिक बयान और भाजपा पर लगाए गए आरोप निश्चित रूप से सियासी गलियारों में हलचल मचा सकते हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा और अन्य राजनीतिक दल इस पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।

