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प्रतापगढ़ बवाल: महिला अस्पताल कर्मी की संदिग्ध मौत के बाद हंगामा, पुलिस पर हुआ पथराव

प्रतापगढ़ जिले के रानीगंज थाना क्षेत्र के दुर्गागंज बाजार स्थित एक निजी अस्पताल में काम करने वाली 22 वर्षीय अनुसूचित जाति की महिला कर्मी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। इस घटना के बाद परिजनों और ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया। गुस्साए लोगों ने अस्पताल के सामने शव रखकर गैंगरेप और हत्या का मुकदमा दर्ज करने की मांग की। जब पुलिस ने मामले में हस्तक्षेप किया तो हालात बिगड़ गए और हिंसा भड़क उठी।

घटना का विवरण

मृतका की मां के अनुसार, उनकी बेटी गुरुवार शाम लगभग छह बजे अस्पताल में ड्यूटी पर गई थी। रात आठ बजे अस्पताल के एक कर्मी ने उन्हें फोन कर बुलाया, लेकिन जब वे पहुंची तो उन्हें अंदर जाने नहीं दिया गया। थोड़ी देर बाद बेटी की मौत की सूचना मिली। इसके बाद अस्पताल प्रशासन की ओर से एंबुलेंस में शव भेज दिया गया, लेकिन ग्रामीणों ने शव देखकर हंगामा शुरू कर दिया।

‘बेटी के शरीर पर अंडरगारमेंट नहीं थे’

मृतका की मां ने दावा किया कि उनकी बेटी के शरीर पर चोट के निशान थे और उसके कपड़े अस्त-व्यस्त थे। उन्होंने आशंका जताई कि बेटी के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया और फिर उसकी हत्या कर दी गई। गुस्साए ग्रामीणों ने अस्पताल कर्मचारियों को पकड़कर बंधक बना लिया, जिसके बाद पुलिस उन्हें अपने साथ ले गई।

पुलिस पर पथराव, सीओ सहित 13 लोग घायल

शुक्रवार सुबह जब पुलिस ने मुकदमा दर्ज करने में देरी की तो गुस्साए ग्रामीणों ने शव के साथ प्रदर्शन शुरू कर दिया। वे चारपाई पर शव रखकर अस्पताल की ओर बढ़े। पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया तो झड़प हो गई। इसी दौरान एक पुलिसकर्मी द्वारा प्रदर्शनकारी पर डंडा चलाने के बाद भीड़ उग्र हो गई और पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। इस हिंसा में क्षेत्राधिकारी (सीओ) सहित 13 लोग घायल हो गए। हालात काबू में लाने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा।

अस्पताल में फंसे मरीजों को बचाया गया

घटना के बाद अस्पताल के डॉक्टर और कर्मचारी मौके से फरार हो गए, जिससे वहां भर्ती मरीजों की हालत खराब हो गई। लगभग 12 घंटे तक अस्पताल में बंद रहने के बाद पुलिस ने छत के रास्ते से पहुंचकर प्रसूता सोनम यादव, मंजू गौतम और मधुमेह पीड़ित रामकिशन को बाहर निकाला और सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया।

मामले में छह लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज

मृतका की मां की तहरीर पर पुलिस ने अस्पताल संचालक डॉ. अमित पांडेय, सुनील कुमार, विद्या सागर, शहबाज और मनोरमा देवी के खिलाफ सामूहिक दुष्कर्म, हत्या और अनुसूचित जाति उत्पीड़न अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस ने कुछ आरोपियों को हिरासत में भी लिया है।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट से स्पष्ट नहीं हुआ मौत का कारण

महिला डॉक्टरों की एक टीम ने वीडियोग्राफी के बीच मृतका का पोस्टमार्टम किया, लेकिन मौत के कारण स्पष्ट नहीं हो सके। फोरेंसिक जांच के लिए विसरा और स्लाइड सुरक्षित कर ली गई हैं। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

दुर्गागंज बाजार में सन्नाटा, सुरक्षा के कड़े इंतजाम

घटना के बाद दुर्गागंज बाजार में कर्फ्यू जैसा माहौल बन गया। दुकानों के शटर गिर गए और बाजार में सन्नाटा पसर गया। पुलिस ने भारी संख्या में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती कर दी है और सीसीटीवी फुटेज के जरिए पथराव करने वालों की पहचान की जा रही है।

यह घटना प्रतापगढ़ जिले में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करती है। पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए प्रशासन पर दबाव बढ़ रहा है और लोग निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

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