म्यांमार में 28 फरवरी 2025 से शुरू हुआ भूकंप का सिलसिला अब भी जारी है। भूकंप की तीव्रता और इसके कारण होने वाली तबाही ने पूरे दक्षिण-पूर्व एशियाई देश को हिला कर रख दिया है। ताजा रिपोर्ट के अनुसार, अब तक म्यांमार में भूकंप के कारण 1644 लोगों की मौत हो चुकी है और 2000 से अधिक लोग घायल हुए हैं। राहत और बचाव कार्यों के लिए म्यांमार सरकार के साथ-साथ कई अंतरराष्ट्रीय संगठन भी मदद में जुटे हुए हैं।
भूकंप का सिलसिला और बढ़ती तबाही
म्यांमार में 28 फरवरी को पहले भूकंप के झटके महसूस हुए थे। इसके बाद, लगातार छह भूकंप के झटके देश में महसूस किए गए। इसके बाद से अब तक म्यांमार में कुल 16 बार भूकंप के झटके आए हैं। 29 मार्च को म्यांमार के विभिन्न हिस्सों में भूकंप का ताजा झटका 4.7 तीव्रता का था, जिससे लोग दहशत में हैं और हालात और भी गंभीर हो गए हैं। म्यांमार का भूकंपीय क्षेत्र यूरेशियन और इंडो-ऑस्ट्रेलियाई प्लेटों के बीच होने के कारण हमेशा भूकंपीय खतरे के उच्चतम स्तर पर रहता है।
भूकंप से प्रभावित क्षेत्र
म्यांमार के प्रमुख शहरों जैसे यांगून, मांडले, बागो और सागाइंग में भूकंप से भारी नुकसान हुआ है। इन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में इमारतें ढह गई हैं और हजारों लोग मलबे में दब गए हैं। म्यांमार की कुल आबादी का 46 प्रतिशत हिस्सा इन क्षेत्रों में बसता है, जिससे यह क्षेत्र भूकंपीय दृष्टि से अत्यधिक संवेदनशील है। भूकंप के साथ-साथ सुनामी का भी खतरा बढ़ गया है, क्योंकि म्यांमार की लंबी तटरेखा है।
भारत की सहायता
भारत ने म्यांमार के साथ अपनी दोस्ती और सहयोग की भावना को प्रकट करते हुए संकट के समय में मदद का हाथ बढ़ाया है। भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने म्यांमार के जनरल से व्यक्तिगत रूप से बात की और इस विनाशकारी भूकंप में मारे गए लोगों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की। भारत ने ‘ऑपरेशन ब्रह्मा’ के तहत म्यांमार में राहत और बचाव कार्यों के लिए 15 टन सामग्री, 80 सदस्यीय राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की टीम, और एक फील्ड अस्पताल भेजने का निर्णय लिया है।
इसके अलावा, भारत ने म्यांमार के प्रभावित क्षेत्रों में मानवीय सहायता, राहत सामग्री और खोज-बचाव दल भेजने का सिलसिला तेज कर दिया है। भारतीय सरकार का यह कदम म्यांमार की जनता को यह संदेश देता है कि संकट के इस समय में भारत उनके साथ खड़ा है और हर संभव सहायता प्रदान करेगा।
म्यांमार की स्थिति और रेस्क्यू ऑपरेशन
म्यांमार की सरकार ने आपातकालीन स्थिति की घोषणा की है और सेना व पुलिस की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन जारी रखा है। मलबे में दबे हुए लोगों को निकालने के लिए कोशिशें तेज कर दी गई हैं। कई अंतरराष्ट्रीय राहत संगठन भी म्यांमार की मदद के लिए आगे आए हैं और प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा सहायता, खाने-पीने की सामग्री, और अन्य जरूरी सामान पहुंचा रहे हैं।
भूकंप के बाद के इन कठिन हालात में म्यांमार के लोग और सहायता कार्यकर्ता आशा की एक किरण की तलाश में हैं। लेकिन अभी भी कई क्षेत्रों से संपर्क टूट चुका है और कई लोग लापता हैं, जिनकी खोजबीन जारी है।
भविष्य में भूकंपीय खतरे से बचाव
म्यांमार का भूकंपीय क्षेत्र लगातार सक्रिय रहता है, और वैज्ञानिकों के अनुसार इस क्षेत्र में भविष्य में भी भूकंप के खतरे बने रहेंगे। म्यांमार की सरकार को भूकंप के खतरे से बचाव के उपायों को और प्रभावी बनाने की आवश्यकता है। इसके लिए भूकंपीय निगरानी तंत्र और चेतावनी प्रणालियों को मजबूत करना जरूरी होगा, ताकि भविष्य में किसी बड़े भूकंप के दौरान बचाव कार्यों को और बेहतर तरीके से संचालित किया जा सके।
म्यांमार में आए इस विनाशकारी भूकंप ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया है। मृतकों की संख्या लगातार बढ़ रही है और घायलों की मदद के लिए राहत कार्यों को तेज किया गया है। भारत ने म्यांमार के साथ एकजुटता दिखाते हुए हर संभव मदद देने का वादा किया है। उम्मीद है कि रेस्क्यू ऑपरेशन में तेजी आएगी और म्यांमार के लोग इस कठिन समय से उबर पाएंगे।

