The KN News | 12 मई 2025
‘पड़ोसी पहले’ नीति के तहत भारत ने एक बार फिर मालदीव के साथ अपने गहरे संबंधों को दर्शाते हुए उसे 50 मिलियन डॉलर का महत्वपूर्ण आर्थिक सहयोग प्रदान किया है। यह सहयोग उस समय आया है जब मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुज्जू ने हाल ही में अपनी विदेश नीति में की गई “बड़ी गलती” को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया था।
यह सहायता भारत-मालदीव के बीच 2019 से चल रहे एक विशेष सरकारी-से-सरकारी व्यवस्था के तहत दी गई है, जिसके अंतर्गत भारत ने एक वर्ष के लिए ट्रेजरी बिल का रोलओवर (नवीनीकरण) किया है। इस राशि का उपयोग मालदीव अपनी आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करने और वित्तीय सुधारों को लागू करने में करेगा।
मालदीव के विदेश मंत्री अब्दुल्ला खलील ने सोशल मीडिया पर भारत का आभार व्यक्त करते हुए लिखा, “मैं भारत सरकार और विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर का इस महत्वपूर्ण वित्तीय सहायता के लिए दिल से आभार व्यक्त करता हूँ। यह समय पर मिला सहयोग हमारे दोनों देशों की गहरी मित्रता का प्रमाण है और मालदीव की सरकार को आर्थिक सुधारों को लागू करने में मदद करेगा।”
भारतीय उच्चायोग के अनुसार, यह सहयोग केवल आर्थिक स्तर पर नहीं है, बल्कि भारत ने मालदीव को आवश्यक वस्तुओं के निर्यात के लिए विशेष कोटा भी इस वर्ष की शुरुआत में प्रदान किया था।
ध्यान देने वाली बात यह है कि कुछ दिन पहले ही मालदीव के रक्षा मंत्री मोहम्मद ग़स्सान मऊमून ने कहा था कि भारत के साथ की गई पुरानी संधियों की समीक्षा की जा रही है, ताकि वे मालदीव की संप्रभुता और स्वतंत्रता की रक्षा करें। इन राजनीतिक बयानों के बावजूद, भारत की यह आर्थिक मदद यह संकेत देती है कि वह मालदीव के साथ अपने संबंधों को केवल कूटनीति के बजाय स्थायी सहयोग के माध्यम से सुदृढ़ करना चाहता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम न केवल मालदीव में चीन के बढ़ते प्रभाव का संतुलन साधने के लिए है, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की नेतृत्वकारी भूमिका को भी मज़बूत करता है।
इस तरह, जब एक ओर भारत-पाकिस्तान संबंधों में तनाव बढ़ रहा है, वहीं भारत का यह कदम दक्षिण एशिया में अपनी रणनीतिक पकड़ को बनाए रखने और पड़ोसी देशों को आर्थिक स्थिरता का विकल्प प्रदान करने की दिशा में एक अहम रणनीतिक पहल माना जा रहा है।

