मुंबई, 01 अप्रैल 2025 – अमेरिकी टैरिफ को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को भारी गिरावट देखी गई।
सुबह की शुरुआत में ही भारी गिरावट
हफ्ते के पहले कारोबारी दिन, मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ खुला। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 639.13 अंक गिरकर 76,775.79 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 180.25 अंक टूटकर 23,339.10 के स्तर पर आ गया।
दोपहर में स्थिति और खराब हुई
दोपहर 01:29 बजे सेंसेक्स 1,408.04 (1.81%) अंकों की गिरावट के साथ 76,025.55 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं, निफ्टी 361.60 (1.54%) अंक टूटकर 23,157.75 के स्तर पर आ गया।
आईटी शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पारस्परिक टैरिफ पर अनिश्चितता के कारण आईटी सेक्टर में सबसे अधिक गिरावट देखी गई। प्रमुख आईटी कंपनियों जैसे इंफोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), एचसीएल टेक और अन्य बड़े वित्तीय संस्थानों के शेयरों में गिरावट रही।
किन सेक्टर्स को हुआ नुकसान और फायदा?
नुकसान में:
- इंफोसिस
- टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS)
- बजाज फाइनेंस
- एचडीएफसी बैंक
- एक्सिस बैंक
- बजाज फिनसर्व
- एचसीएल टेक
- मारुति सुजुकी
बढ़त में:
- इंडसइंड बैंक (5% तक की वृद्धि)
- पावर ग्रिड
- भारती एयरटेल
- महिंद्रा एंड महिंद्रा
- अडानी पोर्ट्स
- नेस्ले
- एनटीपीसी
विदेशी निवेशकों की बिकवाली से भी दबाव
एक्सचेंज डेटा के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने शुक्रवार को 4,352.82 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जिससे बाजार पर और दबाव बढ़ा। सोमवार को ईद-उल-फितर की छुट्टी के कारण बाजार बंद था, जिसके बाद मंगलवार को यह भारी बिकवाली देखने को मिली।
वैश्विक बाजारों की स्थिति
- एशियाई बाजारों में मिश्रित रुझान देखने को मिला। टोक्यो, शंघाई और हांगकांग में बाजार सकारात्मक क्षेत्र में थे।
- अमेरिकी बाजार में सोमवार को बढ़त देखी गई, लेकिन ट्रंप के संभावित टैरिफ ऐलान के कारण निवेशक सतर्क हैं।
- राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 2 अप्रैल को पारस्परिक टैरिफ को लेकर बड़ा ऐलान कर सकते हैं, जिससे वैश्विक बाजारों पर असर पड़ सकता है।
भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का प्रमुख कारण अमेरिकी टैरिफ को लेकर बढ़ती चिंताएं हैं। आईटी और वित्तीय सेक्टर में सबसे ज्यादा गिरावट देखी गई, जबकि कुछ कंपनियां जैसे इंडसइंड बैंक और भारती एयरटेल ने बढ़त दर्ज की। विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने भी बाजार पर दबाव बढ़ाया है। अब निवेशकों की नजर अमेरिकी राष्ट्रपति के अगले कदम पर टिकी है, जो आगे के बाजार रुझानों को तय कर सकता है।

