नई दिल्ली: इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता कंपनी Gensol Electric Vehicles Private Limited (Gensol EV) ने अपने सभी शेष कर्मचारियों को निकालते हुए 30 अप्रैल तक संचालन पूरी तरह बंद करने की घोषणा कर दी है। यह फैसला एक आंतरिक कॉल के दौरान कंपनी के सीईओ प्रतीक राजेन्द्रकुमार गुप्ता द्वारा लिया गया।
यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है जब भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने 16 अप्रैल को एक अंतरिम आदेश जारी कर Gensol समूह के खिलाफ “व्यवस्थित धोखाधड़ी और फंड डायवर्जन” का आरोप लगाया। SEBI की जांच में पाया गया कि कंपनी ने IREDA और Power Finance Corporation से कुल 663.89 करोड़ रुपये का ऋण लिया था, जिसमें से सिर्फ 4,704 इलेक्ट्रिक वाहन ही वितरित किए गए जिनकी कीमत 567.73 करोड़ रुपये थी। बाकी 262.13 करोड़ रुपये कथित तौर पर “लेयर्ड ट्रांजैक्शन्स” के माध्यम से निजी लाभ के लिए निकाल लिए गए।
SEBI ने Gensol ग्रुप की कई सहायक कंपनियों और संबंधित संस्थाओं का भी उल्लेख किया जो इन संदिग्ध लेन-देन में शामिल थीं।
कंपनी का प्रमुख प्रोजेक्ट EZIO और EZIBOT नामक दो-सीटर और कार्गो ईवी वाहन था, जिसके लिए दावा किया गया था कि 30,000 प्री-ऑर्डर मिले हैं। बाद में SEBI ने अपनी जांच में खुलासा किया कि ये प्री-ऑर्डर केवल समझौता ज्ञापन (MoUs) थे, जिनकी कोई वैधता नहीं थी।
पुणे के चाकण स्थित Gensol EV के प्लांट में NSE प्रतिनिधि की एक विज़िट के दौरान यह भी पाया गया कि वहां कोई उत्पादन नहीं हो रहा था। मात्र 2-3 मजदूर मौजूद थे और बिजली खपत से भी यही संकेत मिला कि फैक्ट्री में कोई सक्रिय गतिविधि नहीं थी।
इस घटनाक्रम ने देश में ईवी स्टार्टअप्स की पारदर्शिता और निवेशकों की सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं

