नई दिल्ली, 02 अप्रैल 2025 | लोकसभा में बुधवार को वक्फ संशोधन विधेयक पेश किया गया। इस विधेयक के तहत वक्फ संपत्ति विवादों के निपटारे में राज्य सरकारों को अधिक शक्तियां दी जाएंगी। सरकार ने स्पष्ट किया कि इस विधेयक का असर पुरानी मस्जिदों, दरगाहों या अन्य धार्मिक संस्थानों पर नहीं पड़ेगा।
रिजिजू का भावनात्मक संबोधन संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने विधेयक पेश करते हुए कहा, “किसी की बात कोई बुरा-गम न समझेगा, जमीन का दर्द कभी आसमान नहीं समझेगा…।” उन्होंने आशा जताई कि विधेयक का विरोध करने वाले भी इसे सकारात्मक दृष्टिकोण से देखेंगे और समर्थन करेंगे।
संयुक्त संसदीय समिति में ऐतिहासिक चर्चा रिजिजू ने बताया कि संयुक्त संसदीय समिति में इस विधेयक पर व्यापक चर्चा हुई। 284 प्रतिनिधिमंडलों ने अपने विचार प्रस्तुत किए और 25 राज्य सरकारों तथा केंद्र शासित प्रदेशों के वक्फ बोर्डों ने भी अपनी प्रस्तुतियां दीं।
वक्फ संपत्ति का दावा और संसद भवन का संदर्भ रिजिजू ने बताया कि दिल्ली में 1970 से सीजीओ कॉम्प्लेक्स और संसद भवन समेत कई संपत्तियों पर वक्फ संपत्ति होने का दावा किया गया था। यूपीए सरकार के दौरान 123 संपत्तियां डीनोटिफाई कर वक्फ बोर्ड को सौंपी गई थीं। उन्होंने कहा, “अगर मोदी सरकार सत्ता में नहीं आती तो कई संपत्तियां डी-नोटिफाई हो जातीं।”
विपक्ष का विरोध कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने सरकार पर कानून जबरन थोपने का आरोप लगाया और कहा कि सदस्यों को संशोधन करने का अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि विधेयक पर और अधिक चर्चा की आवश्यकता है।
अमित शाह का पलटवार गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि इस विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति को दिया गया था, जहां विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। उन्होंने कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए कहा कि पहले की समितियां केवल अनुमोदन की प्रक्रिया निभाती थीं, जबकि वर्तमान समिति विचार-विमर्श कर बदलाव करती है।
विधेयक को लेकर लोकसभा में चर्चा जारी है और सरकार इसे जल्द से जल्द पारित कराने की कोशिश में है।

