नई दिल्ली। लोकसभा में केंद्र सरकार द्वारा वक्फ संशोधन विधेयक 2024 पेश किए जाने के बाद देशभर में राजनीतिक माहौल गरमा गया है। यह विधेयक संपत्ति से जुड़े मुद्दों को लेकर लाया गया है, जिसे केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने सदन में पेश किया। सरकार का दावा है कि यह विधेयक धार्मिक व्यवस्थाओं में कोई हस्तक्षेप नहीं करता, बल्कि पारदर्शिता और सुचारू प्रशासन को बढ़ावा देता है।
भोपाल और दिल्ली में मुस्लिम महिलाओं का समर्थन
जहां विपक्ष इस विधेयक का विरोध कर रहा है, वहीं भोपाल और दिल्ली में मुस्लिम महिलाओं ने खुलकर इसका समर्थन किया है। भोपाल में प्रदर्शन कर रही महिलाओं के हाथों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन में तख्तियां देखी गईं, जिन पर लिखा था— “मोदी जी तुम संघर्ष करो, हम तुम्हारे साथ हैं।” महिलाओं ने यह भी कहा कि इस विधेयक से वक्फ बोर्ड में मुस्लिम महिलाओं को प्रतिनिधित्व मिलेगा और वे अपनी संपत्तियों के सही हकदार बन सकेंगी। दिल्ली में भी महिलाओं ने वक्फ संशोधन विधेयक के समर्थन में प्रदर्शन किया और पीएम मोदी को धन्यवाद दिया।
राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया
लोकसभा में इस विधेयक को जेडीयू, टीडीपी और जेडीएस जैसे दलों का समर्थन मिला है, जबकि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी समेत अन्य विपक्षी दल इसके विरोध में खड़े हैं। कांग्रेस ने इसे संविधान विरोधी बताया, जबकि समाजवादी पार्टी ने इसे मुस्लिम समुदाय के खिलाफ बताया।
डीएमके सांसद कनिमोझी ने कहा कि उनकी पार्टी इस विधेयक का पुरजोर विरोध करेगी। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने विधानसभा में इस विधेयक के खिलाफ प्रस्ताव भी पारित किया है। वहीं, आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने आरोप लगाया कि भाजपा वक्फ संपत्तियों पर कब्जा कर उन्हें अपने सहयोगियों को सौंपने की योजना बना रही है।
विपक्ष के आरोप और सरकार का पक्ष
सुप्रिया सुले ने कहा कि उनकी पार्टी इस विधेयक का अध्ययन कर रही है और विपक्षी गठबंधन I.N.D.I.A पूरी एकजुटता से इसका विरोध करेगा। दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि यह विधेयक वक्फ संपत्तियों की आमदनी को सही हाथों तक पहुंचाने और पिछड़े मुसलमानों व महिलाओं को अधिक अधिकार देने के उद्देश्य से लाया गया है।
वक्फ संशोधन विधेयक 2024 के पक्ष और विपक्ष में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। जहां कुछ लोग इसे मुस्लिम महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम मान रहे हैं, वहीं विपक्ष इसे मुस्लिम समाज के अधिकारों पर कुठाराघात बता रहा है। लोकसभा में इस विधेयक पर आगे की बहस और विपक्षी दलों की रणनीति पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

