By The KN News Desk
नई दिल्ली: अभिनेता प्रतीक गांधी और पत्रलेखा की आगामी फिल्म ‘फुले’ एक बार फिर सुर्खियों में है। समाज सुधारकों महात्मा ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले की ज़िंदगी पर आधारित इस फिल्म की रिलीज़ पर रोक लगने के बाद देशभर में बहस छिड़ गई है। फिल्म पर “जातिवाद फैलाने” का आरोप लगाकर उसकी रिलीज़ टाल दी गई है, जिस पर अब मशहूर फिल्म निर्माता अनुराग कश्यप ने सेंसर बोर्ड (CBFC) पर तीखा हमला बोला है।
अनुराग कश्यप ने इंस्टाग्राम पोस्ट के ज़रिए अपने गुस्से का इज़हार करते हुए लिखा:
“धड़क 2 की स्क्रीनिंग में सेंसर बोर्ड ने बोला कि मोदी जी ने इंडिया में जातिवाद खत्म कर दिया है। उसी आधार पर संतोष भी भारत में रिलीज़ नहीं हुई। अब ब्राह्मण को दिक्कत है फुले से। भैया, जब जातिवाद है ही नहीं, तो काहे का ब्राह्मण? कौन हो आप? आपकी क्यों सुलग रही है?
जब जातिवाद नहीं था तो ज्योतिबा फुले और सावित्री बाई क्यों थे? या तो आपका ब्राह्मण समाज यहां नहीं है क्योंकि मोदी जी के हिसाब से भारत में जातिवाद नहीं है… या सब लोग मिलकर सबको बेवकूफ बना रहे हैं। भाई, मिलकर फैसला कर लो – भारत में जातिवाद है या नहीं। लोग बेवकूफ नहीं हैं।”
फिल्म के खिलाफ सियासत गरम
‘फुले’ फिल्म के खिलाफ विरोध करने वालों का कहना है कि यह फिल्म जातीय भावनाओं को भड़काती है और सामाजिक विभाजन को बढ़ावा देती है। वहीं समर्थकों का कहना है कि यह फिल्म इतिहास के उन पन्नों को उजागर करती है, जिन्हें दबाने की कोशिश की जाती रही है।
क्या कहती है फिल्म की टीम?
फिल्म के निर्देशक और कलाकारों ने अब तक आधिकारिक बयान नहीं जारी किया है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक, टीम इस विवाद को लेकर बेहद निराश है। ‘फुले’ की रिलीज़ डेट फिलहाल अनिश्चितकाल के लिए टाल दी गई है।
The KN News का नज़रिया
‘फुले’ केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि भारत के सामाजिक सुधार आंदोलन की आवाज़ है। यदि हम सच का सामना करने से डरेंगे तो इतिहास को कैसे समझ पाएंगे? अनुराग कश्यप के सवाल इसी सच्चाई की ओर इशारा करते हैं – कि क्या हम जातिवाद के अस्तित्व को स्वीकार कर सुधार की ओर बढ़ेंगे, या फिर उसे नकार कर बहसों में उलझे रहेंगे?
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