बिहार की सियासत में बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री और राष्ट्रीय लोक जनता पार्टी (RLJP) के नेता पशुपति कुमार पारस ने एनडीए से नाता तोड़ने का ऐलान कर दिया है। अब चर्चा है कि वह तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाले महागठबंधन में शामिल हो सकते हैं।
पारस, जो दिवंगत नेता रामविलास पासवान के भाई हैं, ने सोमवार को घोषणा की कि वह भाजपा नीत एनडीए का हिस्सा नहीं रहेंगे, क्योंकि गठबंधन ने उनके भतीजे चिराग पासवान को तरजीह दी है। पारस ने कहा,
“मैं 2014 से एनडीए के साथ था। आज मैं ऐलान करता हूं कि मेरी पार्टी अब एनडीए का हिस्सा नहीं रहेगी।”
बताया जा रहा है कि महागठबंधन में पारस की पार्टी को आगामी बिहार विधानसभा चुनाव में कुछ सीटें दी जा सकती हैं। एक आरजेडी नेता के मुताबिक, पारस की पार्टी, चिराग पासवान के वोटबैंक में सेंध लगा सकती है, जिससे एनडीए को नुकसान होगा।
हाल ही में पारस ने आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव से मुलाकात भी की थी, हालांकि उन्होंने अपने भविष्य की योजनाओं को स्पष्ट नहीं किया था। उन्होंने कहा था कि वह बिहार के सभी 243 विधानसभा क्षेत्रों में अपनी पार्टी को मजबूत करना चाहते हैं।
बिहार में अनुसूचित जातियों (SCs) की आबादी लगभग 20% है, जिसमें पासवान समुदाय की बड़ी भूमिका है। ऐसे में पारस के महागठबंधन में शामिल होने से राज्य की सियासत में नया समीकरण बन सकता है।
एनडीए से ‘उपेक्षा’ का दर्द
गौरतलब है कि 2020 के बिहार चुनाव में एनडीए ने 125 सीटें जीती थीं, जबकि महागठबंधन को 110 सीटें मिली थीं।
पारस ने 2019 में हाजीपुर सीट से जीत दर्ज की थी, जो रामविलास पासवान का गढ़ मानी जाती थी। अब यह सीट चिराग पासवान के पास है।
एनडीए में रहते हुए भी पारस की अनदेखी की गई थी। पिछले साल पांच विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में उनकी पार्टी को टिकट नहीं मिला। इसके अलावा, जिस सरकारी बंगले से पारस पार्टी का संचालन करते थे, उसे भी खाली कराकर चिराग को सौंप दिया गया।
2020 में चिराग द्वारा नीतीश कुमार के खिलाफ बगावत के बाद पारस ने उनसे अलग राह पकड़ ली थी। अब उनके महागठबंधन में जाने से बिहार की राजनीति में बड़ा फेरबदल हो सकता है।
(एजेंसियों से प्राप्त जानकारी के आधार पर)

