भारत ने पाकिस्तान के साथ 1960 की सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया है, जिससे दोनों देशों के बीच जल विवाद एक नया मोड़ ले चुका है। यह कदम जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद उठाया गया, जिसमें 26 भारतीय पर्यटकों की जान गई। भारत ने इस हमले के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराया और इसके बाद कई कड़े कदम उठाए। इनमें पाकिस्तान के साथ जल संधि स्थगन, वाघा-अटारी सीमा बंद करना, पाकिस्तानी राजनयिकों को निष्कासित करना और पाकिस्तानी नागरिकों को 48 घंटे में भारत छोड़ने का आदेश शामिल है ।
सिंधु जल संधि के तहत, भारत को तीन पूर्वी नदियों – रावी, ब्यास और सतलुज – पर नियंत्रण है, जबकि पाकिस्तान को तीन पश्चिमी नदियों – सिंधु, झेलम और चेनाब – पर नियंत्रण प्राप्त है। भारत ने झेलम नदी में पानी छोड़ने की कार्रवाई की, जिससे पाकिस्तान के मुजफ्फराबाद क्षेत्र में अचानक बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गई। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि भारत ने बिना पूर्व सूचना के पानी छोड़ा, जिससे जलस्तर में अप्रत्याशित वृद्धि हुई और बाढ़ का खतरा उत्पन्न हो गया ।
पाकिस्तान की आपदा प्रबंधन एजेंसी ने मुजफ्फराबाद और आसपास के क्षेत्रों में बाढ़ की चेतावनी जारी की है। स्थानीय प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है। इस स्थिति ने पाकिस्तान में जल संकट की गंभीरता को और बढ़ा दिया है, क्योंकि देश पहले ही सूखे और जल की कमी से जूझ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का यह कदम जल को एक रणनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे पाकिस्तान की कृषि, पीने के पानी की आपूर्ति और बिजली उत्पादन पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि, भारत ने अभी तक जल प्रवाह पूरी तरह से रोकने की कार्रवाई नहीं की है, लेकिन यह कदम पाकिस्तान के लिए एक गंभीर चेतावनी है।

