लखनऊ ब्यूरो, THE KN NEWS
प्रकाशन तिथि: 26 मई 2025 | समय: रात 10:45 बजे
उत्तर प्रदेश की सियासी फिजा एक बार फिर गरमा गई है। साल 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस के बीच संभावित सीट बंटवारे को लेकर मतभेद उभरने लगे हैं। विश्वसनीय सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार, समाजवादी पार्टी कांग्रेस को 35-40 से अधिक सीटें देने के पक्ष में नहीं है, जबकि कांग्रेस की ओर से लगातार ज्यादा सीटों की मांग उठाई जा रही है।
गुपचुप तैयारी में जुटी सपा
सपा के अंदरखाने में विधानसभा चुनाव की तैयारी ज़ोरों पर है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि संगठन स्तर पर बूथ प्रबंधन, पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समीकरणों को मज़बूत करने और संभावित प्रत्याशियों को जमीनी स्तर पर सक्रिय किया जा रहा है। पार्टी किसी भी कीमत पर ऐसी स्थिति नहीं बनाना चाहती, जिसमें उसे कांग्रेस के कमजोर ढांचे का नुकसान उठाना पड़े।
इमरान मसूद के बयान से गरमाई राजनीति
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद के 80-17 वाले बयान ने यूपी की सियासत में नया मोड़ ला दिया है। सपा के अंदर इसे कांग्रेस की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें दूसरे पंक्ति के नेताओं से बयान दिलवाकर सपा नेतृत्व पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है। सूत्र बताते हैं कि सपा इस मनोवैज्ञानिक दबाव में आने वाली नहीं है।
सिद्धांतों की राजनीति या सीटों की सौदेबाज़ी?
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने पहले ही संकेत दे दिए हैं कि गठबंधन की राजनीति में वही दल नेतृत्व करेगा जिसकी राज्य में ज़मीनी पकड़ मजबूत हो। इसी नीति के तहत उन्होंने दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की बजाय आम आदमी पार्टी का समर्थन किया था, जबकि दोनों ही दल इंडिया गठबंधन का हिस्सा हैं।
कांग्रेस की कमजोरी पर सपा का भरोसा नहीं
सपा नेताओं का मानना है कि कांग्रेस का उत्तर प्रदेश में कोई ठोस जनाधार नहीं है। जिन सीटों पर कांग्रेस दावा करती है, वहां न तो उसका संगठन सक्रिय है, न ही ज़मीनी कार्यकर्ता। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस को दी गई सीटों पर प्रत्याशी सपा को ही देने पड़े थे। उस अनुभव के बाद सपा दोबारा वही गलती नहीं दोहराना चाहती।
गठबंधन की भविष्यवाणी करना जल्दबाज़ी
हालांकि, 2027 के चुनाव में अभी समय है, लेकिन दोनों दलों के बीच बढ़ता अविश्वास आने वाले दिनों में गठबंधन की राह को और मुश्किल बना सकता है। अगर सपा और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे को लेकर सहमति नहीं बनती, तो यह इंडिया गठबंधन की एकता पर भी सवाल खड़ा कर सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों की राय
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सपा अगर अकेले दम पर चुनाव लड़ने की तैयारी में है, तो वह सीटों पर अपना वर्चस्व बनाए रखने के लिए कोई भी समझौता नहीं करेगी। वहीं, कांग्रेस के लिए यह चुनाव अस्तित्व की लड़ाई बन सकता है, खासकर तब जब लोकसभा चुनावों में उसकी स्थिति बहुत प्रभावशाली नहीं रही।
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