लखनऊ, 10 जुलाई 2025 | संवाददाता – The KN News
उत्तर प्रदेश में सरकारी परिषदीय स्कूलों के विलय को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। एक ओर समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए इसे गरीब और वंचित वर्गों के बच्चों के खिलाफ बताया, वहीं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पलटवार करते हुए सपा कार्यकाल में शिक्षा की दुर्दशा को लेकर जोरदार हमला बोला है।
🔴 भाजपा का पलटवार: “खंडहर बन चुके थे स्कूल”
लखनऊ के पॉलिटेक्निक चौराहा और कालिदास मार्ग जैसे प्रमुख स्थानों पर भाजपा ने बड़े-बड़े होर्डिंग्स लगाकर अखिलेश यादव और उनकी सरकार पर तीखा हमला बोला है। इन होर्डिंग्स में लिखा गया है—
“अखिलेश यादव के चार साल में 7 लाख बच्चों ने स्कूल छोड़ा। सपा सरकार में स्कूल खंडहर बन गए थे। 2017 के बाद योगी सरकार ने इन्हें समग्र शिक्षा के मंदिरों में बदल दिया।”
पोस्टर में पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और मौजूदा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तस्वीरें भी प्रमुखता से प्रदर्शित की गई हैं, जिसमें भाजपा यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि सपा सरकार में शिक्षा की हालत जर्जर थी जबकि योगी सरकार में शिक्षा व्यवस्था में बुनियादी सुधार हुए हैं।
🔴 सपा का आरोप: “गरीब और PDA के बच्चों से छीनी जा रही शिक्षा”
वहीं सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने हाल ही में बयान जारी कर कहा—
“सरकार द्वारा परिषदीय स्कूलों का विलय दरअसल गरीब, पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक बच्चों की शिक्षा को बाधित करने की साजिश है। यह फैसला ‘पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक’ (PDA) के भविष्य पर हमला है।”
अखिलेश ने कहा कि स्कूलों का विलय केवल आंकड़ों की बाजीगरी है, जिससे बच्चों को पास के स्कूल में भेजने की मजबूरी होगी, जिससे वे स्कूल छोड़ सकते हैं या पढ़ाई में पिछड़ सकते हैं।
🔴 योगी सरकार की गिनाई गई उपलब्धियां
भाजपा द्वारा लगाए गए होर्डिंग में योगी सरकार की शिक्षा क्षेत्र में की गई प्रमुख योजनाओं और उपलब्धियों का उल्लेख भी किया गया है। इनमें शामिल हैं:
- अटल आवासीय विद्यालय: 18 मंडलों में स्थापित
- मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालय: 57 जनपदों में निर्माण
- पूर्वांचल का पहला सैनिक स्कूल: गोरखपुर में स्थापित
- 680 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों का उच्चीकरण
- 39 नए हाईस्कूल और 14 नए इंटर कॉलेजों का निर्माण
- 25,784 परिषदीय विद्यालयों में स्मार्ट क्लासेस
- 5,568 ICT लैब्स की स्थापना
- 7 नए केंद्रीय विद्यालयों की स्थापना प्रक्रियाधीन
भाजपा नेताओं का दावा है कि ये सभी कदम शिक्षा के स्तर को सुधारने और बच्चों को आधुनिक संसाधन देने के उद्देश्य से उठाए गए हैं।
🔴 हाईकोर्ट से भी सरकार को राहत
इस पूरे विवाद के बीच उत्तर प्रदेश सरकार को लखनऊ पीठ से कानूनी राहत भी मिली है। सरकारी स्कूलों के विलय को चुनौती देने वाली याचिकाओं को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। कोर्ट में सरकार की ओर से यह तर्क दिया गया कि—
“विलय की प्रक्रिया बच्चों के हित में और संसाधनों के बेहतर उपयोग के उद्देश्य से की जा रही है।”
🔴 सियासी नफा-नुकसान का खेल
शिक्षा को लेकर उठे इस विवाद ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा और सपा के बीच हर मुद्दे को लेकर सीधी टक्कर होगी। जहां भाजपा “सुधार और विकास” के मॉडल को जनता के सामने पेश कर रही है, वहीं सपा “समावेशी और सामाजिक न्याय” के मुद्दे को उठाकर विपक्ष की भूमिका को मजबूत कर रही है।
🔴 जनता क्या सोच रही है?
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के इस दौर में असली सवाल यह है कि क्या सरकार द्वारा लिए गए फैसले वास्तव में छात्रों के हित में हैं? क्या स्कूलों का विलय बच्चों की पढ़ाई में बाधा बनेगा या यह संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल का उदाहरण होगा? क्या विपक्ष के आरोप केवल राजनीतिक स्टंट हैं या इनमें सच्चाई है?
इन सवालों के जवाब भविष्य में सरकारी रिपोर्टों, जमीनी हकीकत और जनता की प्रतिक्रिया से सामने आएंगे। फिलहाल इतना तय है कि शिक्षा, जो कि समाज की नींव है, अब उत्तर प्रदेश की राजनीति का भी केंद्रीय मुद्दा बन गई है।

