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वोट चोरी के आरोपों पर दिल्ली में सियासी संग्राम तेज, कांग्रेस की विशाल रैली; मनोज झा बोले—निष्पक्ष चुनाव ही असली मुद्दा, भाजपा ने किया पलटवार

नई दिल्ली। ‘वोट चोरी’ और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के रामलीला मैदान में कांग्रेस ने रविवार को विशाल रैली का आयोजन किया। रैली के बहाने चुनाव आयोग, ईवीएम और मतदाता सूची से जुड़े सवालों ने एक बार फिर देश की राजनीति को गरमा दिया। इस रैली पर विपक्षी दलों के साथ-साथ सत्तारूढ़ भाजपा ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी, जिससे राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।

राजद सांसद मनोज कुमार झा ने कांग्रेस की रैली पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि असली मुद्दा निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव का है, लेकिन इस पर गंभीर चर्चा की बजाय ध्यान भटकाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को इस पूरे मामले में अधिक सक्रिय और जवाबदेह भूमिका निभानी चाहिए। मनोज झा ने यह भी आरोप लगाया कि बिहार चुनावों के दौरान वित्तीय लेन-देन और अन्य गतिविधियां इस बात की ओर इशारा करती हैं कि किसी भी तरह से चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिशें हुई हैं।

भाजपा का पलटवार: कांग्रेस अपने कर्मों का फल भुगत रही

कांग्रेस की इस रैली पर भाजपा नेता शाहनवाज हुसैन ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की यह रैली पूरी तरह विफल साबित होगी। उनके मुताबिक कांग्रेस पार्टी अपने ही कर्मों का फल भुगत रही है और अब हार का ठीकरा ईवीएम, एसआईआर और चुनाव आयोग के सिर फोड़ना चाहती है।
हुसैन ने कहा, “कांग्रेस के नेता खुद अपने नेतृत्व पर सवाल उठा रहे हैं। इन्हीं सवालों से ध्यान हटाने के लिए इस तरह की रैलियां की जा रही हैं। भीड़ जुटा लेने से सच्चाई नहीं बदलती।”

उन्होंने यह भी याद दिलाया कि दिल्ली की जनता ने कांग्रेस को शून्य पर ला दिया था और बिहार में पार्टी महज छह सीटों पर सिमट गई थी। ऐसे में चुनावी हार की जिम्मेदारी लेने के बजाय कांग्रेस बहाने तलाश रही है।

अजय कुमार लल्लू का आरोप: ‘भाजपा सरकार वोट चोरी की सरकार’

रैली को संबोधित करते हुए ओडिशा कांग्रेस के प्रभारी अजय कुमार लल्लू ने केंद्र की भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि देश में लोकतंत्र को बंधक बना लिया गया है और मौजूदा सरकार ‘वोट चोरी की सरकार’ बन चुकी है।
लल्लू ने दावा किया कि राहुल गांधी ने विभिन्न राज्यों में प्रेस वार्ता कर वोटर लिस्ट और बूथ स्तर की जानकारी सामने रखी है, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में खामियां उजागर हुई हैं। उनके अनुसार भाजपा लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर कर तानाशाही की ओर बढ़ रही है।

आप का सवाल: क्या राहुल गांधी दिल्ली के मुद्दे पर बोलेंगे?

इस रैली पर आम आदमी पार्टी (आप) ने भी कांग्रेस से सवाल पूछे। दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने कहा कि जन-जागृति के किसी भी प्रयास का वे स्वागत करते हैं, लेकिन उन्होंने कांग्रेस की नीयत पर सवाल खड़े किए।
भारद्वाज ने कहा कि एक साल पहले जब दिल्ली में वोट चोरी के आरोप लगे थे और आप के नेताओं ने सबूत पेश किए थे, तब कांग्रेस चुप रही। उन्होंने पूछा कि क्या राहुल गांधी दिल्ली में कथित वोट चोरी के मुद्दे पर खुलकर बात करेंगे या इससे बचेंगे। अगर वे बचते हैं, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि कांग्रेस का यह नैरेटिव देश के लिए नहीं, बल्कि सिर्फ अपनी राजनीति के लिए है।

चुनावी प्रक्रिया पर फिर उठे सवाल

कांग्रेस की इस रैली ने एक बार फिर चुनावी प्रक्रिया, ईवीएम की विश्वसनीयता, मतदाता सूची के पुनरीक्षण और चुनाव आयोग की भूमिका पर बहस को केंद्र में ला दिया है। जहां कांग्रेस और उसके सहयोगी दल निष्पक्ष चुनाव की मांग को लेकर सरकार पर दबाव बना रहे हैं, वहीं भाजपा इसे हार की हताशा बता रही है।

आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है, खासकर तब जब विभिन्न राज्यों में आगामी चुनावों की तैयारियां तेज हो रही हैं। फिलहाल, ‘वोट चोरी’ का यह सियासी मुद्दा देश की राजनीति में एक नई बहस और टकराव की जमीन तैयार करता दिख रहा है।

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