Headlines

क्या अश्विन को मांकड़िंग के लिए भी याद किया जाएगा?

क्रिकेट का खेल नियमों और शिष्टाचार का एक आदर्श मेल है, लेकिन कुछ घटनाएँ और निर्णय हमेशा चर्चा का विषय बन जाते हैं। एक ऐसी ही घटना थी जब भारतीय स्पिन गेंदबाज रविचंद्रन अश्विन ने 2019 के आईपीएल मैच में जोश बटलर को मांकड़िंग के तरीके से आउट किया था। मांकड़िंग, जिसे “नॉन-स्ट्राइकर रनआउट” भी कहा जाता है, क्रिकेट में विवादास्पद और चर्चित तरीका है। इस लेख में हम यह विश्लेषण करेंगे कि क्या अश्विन को इस घटना के लिए भी मांकड़िंग के प्रतीक के रूप में याद किया जाएगा, जैसा कि पहले वीनू मांकड को याद किया जाता है।

मांकड़िंग का इतिहास

मांकड़िंग का तरीका क्रिकेट के इतिहास में 13 दिसंबर 1947 को पहली बार सामने आया था, जब भारतीय क्रिकेटर वीनू मांकड ने ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज बिल ब्राउन को इस तरीके से आउट किया था। उस समय मांकड की आलोचना की गई थी, क्योंकि यह एक ऐसा तरीका था, जो खेल के शिष्टाचार के खिलाफ माना जाता था। हालांकि, तत्कालीन ऑस्ट्रेलियाई कप्तान डॉन ब्रैडमैन ने मांकड के इस फैसले का समर्थन किया और इसे क्रिकेट के नियमों के तहत सही ठहराया। वीनू मांकड के नाम पर ही इस आउट करने के तरीके को “मांकड़िंग” कहा गया।

अश्विन और मांकड़िंग की घटना

रविचंद्रन अश्विन, जो अपनी गेंदबाजी और क्रिकेट समझ के लिए मशहूर हैं, ने 2019 आईपीएल में राजस्थान रॉयल्स के जोश बटलर को मांकड़िंग के द्वारा आउट किया था। यह घटना क्रिकेट जगत में तुरंत चर्चा का विषय बन गई। बटलर क्रीज से बाहर खड़े थे जब अश्विन ने उन्हें रनआउट कर दिया। यह घटना कई कारणों से विवादित रही। कुछ लोग इसे खेल के नियमों के तहत सही मानते हैं, जबकि कई लोग इसे खेल की भावना के खिलाफ मानते हैं।

अश्विन ने हमेशा अपने इस फैसले को सही बताया है और कहा कि जब कोई खिलाड़ी नियमों का पालन नहीं करता है, तो गेंदबाज को उसे आउट करने का अधिकार होता है। उनका मानना था कि अगर बल्लेबाज क्रीज से बाहर खड़ा होता है, तो यह उसका ही दोष है और उसे आउट करना पूरी तरह से वैध है। इसके बावजूद, मांकड़िंग को लेकर कई बार आलोचना हुई, खासकर जब इसे खेल की भावना के खिलाफ बताया गया।

मांकड़िंग और क्रिकेट की शिष्टाचार

मांकड़िंग, एक ऐसा तरीका है जो क्रिकेट के शिष्टाचार के खिलाफ माना जाता है, क्योंकि यह सीधे तौर पर नॉन-स्ट्राइकर बल्लेबाज की सजगता पर निर्भर करता है। इसके बावजूद, यह क्रिकेट का एक आधिकारिक नियम है और इसे गलत नहीं ठहराया जा सकता। यही कारण है कि मांकड़िंग को अक्सर विवादास्पद माना जाता है।

जब अश्विन ने बटलर को मांकड़िंग से आउट किया, तब आलोचनाओं के बावजूद कई पूर्व क्रिकेट खिलाड़ियों और विशेषज्ञों ने इसे सही ठहराया। इसके बाद, इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) ने इस रनआउट को “नॉन-स्ट्राइकर रनआउट” के नाम से आधिकारिक रूप से स्वीकार कर लिया। इससे यह साबित होता है कि मांकड़िंग को लेकर जो विवाद था, वह नियमों के सही संदर्भ में था, न कि खेल की भावना के उल्लंघन के रूप में।

क्या अश्विन को मांकड़िंग के लिए याद किया जाएगा?

अब सवाल यह उठता है कि क्या अश्विन को मांकड़िंग के लिए याद किया जाएगा? यदि हम क्रिकेट के इतिहास को देखें, तो वीनू मांकड का नाम हमेशा मांकड़िंग के संदर्भ में लिया जाएगा। हालांकि अश्विन ने मांकड़िंग के विवाद को नया मोड़ दिया और इसे एक और उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया, लेकिन उनकी भूमिका इस घटना में काफी महत्वपूर्ण रही।

अश्विन का यह कदम खेल के नियमों को लेकर उनकी स्पष्टता को दर्शाता है। उन्होंने हमेशा यह कहा कि क्रिकेट खेल है, लेकिन नियमों का पालन करना भी उतना ही जरूरी है। यही कारण है कि अगर भविष्य में मांकड़िंग के बारे में बात की जाती है, तो अश्विन का नाम भी इस सूची में जरूर आएगा।

निष्कर्ष

क्रिकेट में कई घटनाएँ और फैसले होते हैं जो समय के साथ विवादास्पद बन जाते हैं। मांकड़िंग की घटना ने हमेशा एक गहरी चर्चा पैदा की है। वीनू मांकड के बाद, अश्विन ने मांकड़िंग के एक नए अध्याय की शुरुआत की, जिससे यह साबित हुआ कि नियमों का पालन करना जरूरी है, चाहे वह तरीका कितना भी विवादास्पद क्यों न हो। इसलिए, यह कहना गलत नहीं होगा कि भविष्य में अश्विन को मांकड़िंग के लिए भी याद किया जाएगा, क्योंकि उन्होंने इस विवादास्पद तरीके को क्रिकेट की नियमावली के हिसाब से पूरी तरह से सही ठहराया।

Don’t miss these tips!

We don’t spam! Read our privacy policy for more info.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *