गाजीपुर। गाजीपुर में समाजवादी पार्टी (एसपी) के कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच एक बड़ा विवाद उत्पन्न हो गया, जब एसपी कार्यकर्ता गृहमंत्री अमित शाह का पुतला फूंकने के लिए जुटे थे। यह कार्यक्रम गृहमंत्री के भीम राव अंबेडकर पर दिए गए बयान के खिलाफ था, जिसे लेकर एसपी कार्यकर्ता नाराज थे।
एसपी कार्यकर्ताओं का आरोप था कि अमित शाह ने हाल ही में एक सार्वजनिक बयान में भीम राव अंबेडकर के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं, जिससे दलित समुदाय में नाराजगी फैल गई थी। इस बयान के विरोध में, एसपी कार्यकर्ताओं ने गृहमंत्री अमित शाह का पुतला फूंकने की योजना बनाई थी।
कार्यक्रम के दौरान जब कार्यकर्ता पुतला जलाने की तैयारी कर रहे थे, पुलिस मौके पर पहुंची और पुतला छीन लिया। इसके बाद पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच नोकझोंक की स्थिति बन गई। पुलिस ने आरोप लगाया कि कार्यकर्ता बिना अनुमति के पुतला जलाने की कोशिश कर रहे थे, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती थी।
वहीं, एसपी कार्यकर्ताओं ने इस कार्रवाई को तानाशाही करार देते हुए कहा कि यह उनके लोकतांत्रिक अधिकार का उल्लंघन है। कार्यकर्ताओं का कहना था कि गृहमंत्री के बयान के खिलाफ शांतिपूर्वक विरोध करना उनका अधिकार है और पुलिस ने उनका विरोध करने का हक छीन लिया।
एसपी नेता और कार्यकर्ता गृहमंत्री अमित शाह के बयान को लेकर आक्रोशित थे और उन्होंने पुलिस की कार्रवाई को कांग्रेस, भाजपा और अन्य सत्ताधारी दलों की तानाशाही का हिस्सा बताया। उनका कहना था कि अगर सरकार अपने बयानों पर जवाबदेही नहीं तय करती, तो विरोध जताने का तरीका यही होगा।
इस घटना के बाद इलाके में तनाव बढ़ गया है। पुलिस ने सुरक्षा के मद्देनजर गाजीपुर में अपनी चौकसी बढ़ा दी है। इस घटना ने एक बार फिर से यह सवाल उठाया है कि क्या लोकतंत्र में विरोध जताने के अधिकार को दबाने की कोशिश की जा रही है।
गाजीपुर में हो रहे इस विवाद के बीच यह चर्चा भी तेज हो गई है कि क्या प्रशासन और पुलिस का इस तरह का हस्तक्षेप लोकतंत्र की मौलिक प्रक्रियाओं को कमजोर कर रहा है।

