मुंबई : 2011 का वनडे विश्व कप फाइनल भारत और श्रीलंका के बीच 2 अप्रैल को मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेला गया था। इस ऐतिहासिक मैच में MS धोनी ने भारतीय टीम के कप्तान के रूप में शानदार प्रदर्शन किया और 79 गेंदों पर नाबाद 91 रन बनाकर भारत को जीत दिलाई। इस मैच में एक बड़ा सवाल यह था कि धोनी ने युवराज सिंह से पहले बैटिंग करने का निर्णय क्यों लिया, जबकि युवराज उस समय शानदार फॉर्म में थे।
अब धोनी ने खुद इस फैसले के पीछे की वजह का खुलासा किया है। एक हालिया इवेंट में धोनी ने बताया कि श्रीलंका के गेंदबाजी आक्रमण को देखकर उन्होंने खुद को बैटिंग के लिए आगे भेजने का निर्णय लिया। श्रीलंकाई टीम में तीन ऑफ स्पिनर थे, जिनमें से दो, मुथैया मुरलीधरन और सुरज रंधिव, धोनी के चेन्नई सुपर किंग्स के साथी खिलाड़ी थे। धोनी ने बताया, “मुझे लगता था कि मुझे इन गेंदबाजों के खिलाफ बेहतर खेलने का अनुभव है। मुरली सर और रंधिव के साथ मैंने कई बार नेट्स में बैटिंग की थी।”
धोनी ने यह भी कहा कि उन्होंने यह फैसला पूरी तरह से अनुभव पर आधारित किया था। “गौतम (गंबीर) और विराट (कोहली) अच्छा खेल रहे थे, और युवराज शानदार फॉर्म में थे। लेकिन फिर भी मुझे कुछ ऐसा महसूस हुआ कि मुझे जाना चाहिए,” धोनी ने बताया। उन्होंने यह भी कहा कि श्रीलंकाई गेंदबाजों के खिलाफ उनका अनुभव और बाएं-दाएं का संयोजन मैच के लिए फायदेमंद हो सकता था।
धोनी के इस फैसले के बाद, उन्होंने गंबीर के साथ मिलकर 109 रन की साझेदारी की और फिर युवराज के साथ 54 रन जोड़े, जिससे भारत को 275 रन का लक्ष्य हासिल करने में मदद मिली। धोनी ने मैच के आखिरी ओवर में एक शानदार छक्का मारा और भारत को छह विकेट से जीत दिलाई।
धोनी के इस प्रदर्शन के लिए उन्हें “प्लेयर ऑफ द मैच” का अवार्ड भी मिला। धोनी ने इस मैच में न केवल एक कप्तान के रूप में नेतृत्व किया, बल्कि अपने अनुभव और समझदारी से टीम को विश्व कप जीताने में अहम भूमिका निभाई।
यह निर्णय अब क्रिकेट इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में याद किया जाता है, और धोनी के फैसले ने यह साबित कर दिया कि एक कप्तान का सही निर्णय मैच का रूख बदल सकता है।

