दिल्ली : केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने 2026 से 10वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा को साल में दो बार आयोजित करने का फैसला किया है। यह कदम छात्रों के परीक्षा तनाव (Exam Stress) को कम करने और उन्हें अपने प्रदर्शन को बेहतर बनाने के अधिक अवसर देने के उद्देश्य से उठाया गया है। नई परीक्षा प्रणाली को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं, जैसे कि यह नियम कब से लागू होगा, छात्रों के पास कितने विकल्प होंगे, रिजल्ट कैसे तय होगा, और क्या यह बदलाव वास्तव में छात्रों के लिए फायदेमंद होगा या नहीं। इस लेख में हम इन सभी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
CBSE 10वीं की परीक्षा में बदलाव: नया नियम क्या है?
CBSE ने 25 फरवरी 2025 को एक आधिकारिक सर्कुलर जारी किया, जिसमें यह स्पष्ट किया गया कि 2026 से 10वीं बोर्ड परीक्षा साल में दो बार होगी। पहली परीक्षा 17 फरवरी से 6 मार्च तक और दूसरी परीक्षा 5 से 20 मई के बीच आयोजित की जाएगी।
शिक्षा मंत्रालय ने यह फैसला छात्रों के मानसिक तनाव को कम करने और उन्हें परीक्षा में बेहतर स्कोर करने का दूसरा मौका देने के लिए लिया है। इससे पहले यह सुविधा केवल कुछ प्रवेश परीक्षाओं, जैसे JEE (संयुक्त प्रवेश परीक्षा) में दी जाती थी। अब इसे 10वीं बोर्ड परीक्षाओं में भी लागू किया जा रहा है।
बोर्ड परीक्षा दो बार होने से छात्रों को क्या फायदा होगा?
CBSE के इस फैसले के पीछे मुख्य उद्देश्य छात्रों के परीक्षा संबंधी दबाव को कम करना है। आमतौर पर बोर्ड परीक्षा एक निर्णायक परीक्षा मानी जाती है, जो छात्रों के शैक्षिक भविष्य को प्रभावित करती है। लेकिन अब छात्रों के पास अधिक लचीलापन होगा।
छात्रों के पास होंगे ये तीन विकल्प
- एक बार परीक्षा देना – यदि कोई छात्र अपने प्रदर्शन को लेकर आत्मविश्वास से भरा हुआ है, तो वह साल में केवल एक बार परीक्षा देकर अपने रिजल्ट को फाइनल कर सकता है।
- दोनों परीक्षाओं में शामिल होना – छात्र यदि चाहे तो दोनों परीक्षाओं में शामिल हो सकता है और बेहतर स्कोर वाली परीक्षा का अंक अपने फाइनल रिजल्ट में शामिल कर सकता है।
- किसी विषय में दोबारा परीक्षा देना – अगर कोई छात्र पहली परीक्षा में किसी विषय में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाता है, तो उसे दूसरी परीक्षा में उस विषय को दोबारा देने का मौका मिलेगा।
रिजल्ट कैसे तय होगा?
यदि कोई छात्र दोनों परीक्षाओं में शामिल होता है, तो उसके दोनों स्कोर में से बेहतर अंक फाइनल रिजल्ट में जोड़ा जाएगा।
यदि दूसरी परीक्षा में अंक पहले से कम आते हैं, तो पहली परीक्षा के अंक ही मान्य होंगे।
इस नियम के कारण छात्रों को अपने प्रदर्शन को सुधारने का एक अतिरिक्त अवसर मिलेगा।
CBSE के नए नियमों पर उठ रहे हैं ये सवाल
CBSE द्वारा 2026 से लागू की जा रही इस नई परीक्षा प्रणाली को लेकर कुछ महत्वपूर्ण सवाल भी खड़े हो रहे हैं।
- क्या यह नियम 10वीं के अलावा 12वीं कक्षा पर भी लागू होगा?
नहीं, फिलहाल यह नियम केवल 10वीं कक्षा के लिए लागू किया गया है। 12वीं बोर्ड परीक्षा को लेकर अभी किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया है।
- क्या छात्रों के लिए दोनों परीक्षाओं में शामिल होना अनिवार्य होगा?
नहीं, छात्रों को यह छूट दी गई है कि वे चाहें तो साल में एक बार ही परीक्षा दें।
- क्या छात्रों को दो परीक्षाओं की अलग-अलग फीस देनी होगी?
नहीं, छात्रों को परीक्षा के लिए केवल एक बार ही रजिस्ट्रेशन कराना होगा, और फीस भी एक साथ ही ली जाएगी।
- क्या दोनों परीक्षाओं के लिए अलग-अलग परीक्षा केंद्र होंगे?
नहीं, छात्रों का परीक्षा केंद्र वही रहेगा, जो पहली परीक्षा के लिए निर्धारित किया गया होगा।
- क्या सप्लीमेंट्री परीक्षा की व्यवस्था रहेगी?
नहीं, CBSE ने सप्लीमेंट्री परीक्षा को समाप्त कर दिया है। अब छात्रों को परीक्षा में कम अंक आने पर दोबारा परीक्षा देने का मौका मिलेगा, जिससे वे अपने स्कोर को सुधार सकेंगे।
क्या यह बदलाव वास्तव में छात्रों के लिए लाभकारी होगा?
इस बदलाव के पक्ष और विपक्ष में कई तर्क दिए जा रहे हैं।
बदलाव के पक्ष में तर्क
- परीक्षा का तनाव कम होगा – छात्रों को पता होगा कि यदि वे पहली परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाए, तो वे दूसरी बार परीक्षा देकर अपने स्कोर को सुधार सकते हैं।
- अधिक अवसर मिलेंगे – छात्रों को एक ही साल में दो बार परीक्षा देने का विकल्प मिलेगा, जिससे वे अपनी गलतियों को सुधार सकते हैं।
- JEE जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयारी का समय मिलेगा – इस नए फॉर्मेट से छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अधिक तैयारी करने का मौका मिलेगा।
बदलाव के खिलाफ तर्क
- बोर्ड परीक्षा का महत्व कम हो सकता है – कुछ शिक्षाविदों का मानना है कि बोर्ड परीक्षा का मूल्य घट सकता है, क्योंकि छात्रों के पास दो मौके होंगे।
- छात्रों पर दोहरी जिम्मेदारी होगी – कुछ छात्रों के लिए साल में दो बार बोर्ड परीक्षा देना मानसिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
- स्कूलों पर अतिरिक्त प्रशासनिक बोझ – स्कूलों को अब दो बार बोर्ड परीक्षा के आयोजन की तैयारी करनी होगी, जिससे उनके प्रशासनिक कार्य बढ़ जाएंगे।
शिक्षा विशेषज्ञों की राय क्या है?
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के अनुसार, यह बदलाव छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए किया गया है। उन्होंने कहा कि जिस तरह JEE जैसी परीक्षाओं में छात्रों को दो बार परीक्षा देने का अवसर मिलता है, उसी तरह 10वीं के छात्रों को भी यह सुविधा मिलनी चाहिए।
NCERT और CBSE से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव भारतीय शिक्षा प्रणाली में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे छात्रों को अपनी क्षमताओं को और बेहतर बनाने का अवसर मिलेगा।
CBSE द्वारा 10वीं बोर्ड परीक्षा को साल में दो बार कराने का निर्णय एक ऐतिहासिक बदलाव है, जो छात्रों को अधिक अवसर और लचीलापन प्रदान करेगा। हालांकि, इसके कुछ संभावित नकारात्मक पहलू भी हैं, जिन पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
इस बदलाव के सफल कार्यान्वयन के लिए स्कूलों, छात्रों और अभिभावकों को नई परीक्षा प्रणाली को समझना होगा और इसके अनुसार अपनी तैयारी करनी होगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि 2026 से शुरू होने वाली यह नई प्रणाली भारतीय शिक्षा प्रणाली को किस दिशा में ले जाती है।
अब यह फैसला छात्रों और अभिभावकों पर निर्भर करता है कि वे इस नए बदलाव को किस तरह अपनाते हैं और इसका अधिकतम लाभ कैसे उठाते हैं।

