संभल : होली का त्योहार और जुम्मे की नमाज एक साथ पड़ने के बाद, संभल के सीओ अनुज चौधरी के बयान ने सियासी हलकों में हलचल मचा दी है। उनके इस बयान पर विवाद पैदा हो गया है, जिससे पुलिस प्रशासन और राजनीतिक दलों के बीच तकरार बढ़ गई है। आइए जानते हैं कि क्या है पूरा मामला और किस तरह से यह सियासी बवाल का कारण बना।
सीओ अनुज चौधरी का बयान
संभल जिले के सीओ अनुज चौधरी ने 6 मार्च को मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधियों से बैठक के दौरान जो बयान दिया, उसने विवाद को जन्म दिया। सीओ ने कहा, “जिस भाई को होली खेलनी हो, वह बाहर निकले, और जिनकी कैपेसिटी हो रंग खेलने की, वह बाहर जाएं। जो नहीं चाहते, वे घर पर रहकर नमाज पढ़ें।” उन्होंने यह भी कहा कि “जुम्मा साल में 52 बार आता है और होली एक बार।”
इस बयान पर सवाल उठने लगे और सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई। उनका कहना था कि इस दिन विशेष तौर पर, होली के रंग बर्दाश्त करने की जो क्षमता रखते हैं, वही बाहर जाएं, जबकि अन्य लोग घर में रहें। उनकी यह टिप्पणी पुलिस के रवैये पर सवाल उठाने का कारण बनी।
अखिलेश यादव का बयान
समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख अखिलेश यादव ने सीओ अनुज चौधरी के बयान को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “जिन अधिकारियों को होली और ईद के दिन गले मिलकर सौहार्द की भावना दिखानी चाहिए, वही नकारात्मक बातें कर रहे हैं। ऐसे में भाजपा के शासन में कैसे सौहार्द की रक्षा की जा सकती है?” हालांकि, उन्होंने अनुज चौधरी का नाम नहीं लिया, लेकिन इशारों-इशारों में उनकी आलोचना की।
अखिलेश यादव का कहना था कि अगर अधिकारी इस तरह की बातें करेंगे, तो समाज में भेदभाव बढ़ेगा, और पुलिस प्रशासन पर से विश्वास उठेगा। उनके इस बयान से यह साफ हो गया कि सपा इस मामले को लेकर सीओ अनुज चौधरी के खिलाफ खड़ी है।
सपा और अनुज चौधरी के बीच पूर्व संबंध
अखिलेश यादव और अनुज चौधरी के बीच पहले भी विवाद हो चुका है। संभल हिंसा के बाद अखिलेश यादव ने अनुज चौधरी और संभल के एसपी के खिलाफ कड़ी टिप्पणियां की थीं। उस वक्त अनुज चौधरी पर गोली चलवाने का आरोप भी लगा था। हालांकि, अब एक बार फिर से अनुज चौधरी के बयान को लेकर सपा ने उन्हें निशाने पर लिया है।
विवाद का कारण
इस बार का विवाद इस वजह से और भी गंभीर हो गया है, क्योंकि होली और जुम्मे का दिन एक साथ पड़ रहे हैं, और रमजान का महीना भी चल रहा है। दोनों समुदायों के लिए ये दिन विशेष महत्व रखते हैं। प्रशासन के लिए यह चुनौतीपूर्ण था कि दोनों समुदायों की भावनाओं का सम्मान करते हुए शांति बनाए रखी जाए।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
सपा के वरिष्ठ नेता राम गोपाल यादव ने भी इस मुद्दे पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जो अधिकारी इस तरह की बात करेंगे, उन्हें भविष्य में जेल भी जाना पड़ सकता है। उनका कहना था कि समय बदलने पर पुलिस अधिकारियों को भी जेल की हवा खानी पड़ सकती है।
इस बयान को लेकर सियासी हलकों में और भी बवाल मच गया। इससे यह साफ हो गया कि सपा इस मुद्दे को लेकर गंभीर है और अनुज चौधरी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर सकती है।
संभल के सीओ अनुज चौधरी का बयान होली और जुम्मे के दिन के संदर्भ में विवाद का कारण बन गया है। इस मामले ने सियासी हलकों में हलचल मचाई है, और इससे यह भी साफ हुआ है कि चुनावी मौसम में हर बयान को सियासी रंग में रंगा जाता है। अब यह देखना होगा कि प्रशासन इस विवाद को कैसे सुलझाता है और क्या इस मुद्दे पर कोई कार्रवाई की जाएगी।
यह पूरा मामला न केवल प्रशासन के रवैये को लेकर सवाल उठाता है, बल्कि समाज में साम्प्रदायिक सौहार्द की भावना को भी चुनौती देता है।

